बद्दी (सोलन)। हिमाचल में लोहा उद्योग सिमटने लगा है। सस्ती बिजली के लालच में आए उद्योगों पर रेल सुविधा नहीं होने की मार पड़ रही है। यहां पर भाड़ा भी बहुत अधिक है। बिजली दरें लगभग सभी राज्यों में समान हो गई हैं। ऐसे में इस्पात उद्योग यहां से पलायन को मजबूर है। बीबीएन में लगे 16 इस्पात उद्योगों में से आठ यहां से शिफ्ट हो गए हैं। जो यहां काम कर रहे हैं, वे भी वेंटिलेटर पर ही चल रहे हैं। इन उद्योगों के बंद होने से दो हजार से अधिक लोगों का रोजगार छीन गया है। बीबीएन में 2003 को औद्योगिक पैकेज आया। इस पैकेज के आने से उद्यमियों को काफी सुविधाएं मिलीं। सबसे बड़ी राहत यहां पर सरप्लस बिजली की थी। बिजली दाम अन्य राज्यों से एक से डेढ़ रुपये प्रति यूनिट कम था। ऐसे में लोहा उद्योग हिमाचल की ओर आकर्षित हुए। एक उद्योग का बिजली का बिल एक से डेढ़ करोड़ प्रति माह आता है। ऐसे में डेढ़ रुपये प्रति यूनिट कम होने से उद्योगपतियों का पैसा बच जाता था जो अन्य राज्यों में नहीं बचता था।
बीबीएन में जय ज्वाला, प्राइम स्टील, फ्रेंड एलायज, कुंडलस उद्योग, माउंटेन स्टील, सिद्धि विनायक, टिमको, रेडियेंट कास्टिंग, गिलबर्ट इस्पात, रामा स्टील, आरआर कास्टिंग, रैनी स्टील, अतुल कास्टिंग, कांगड़ा स्टील, देव भूमि इस्पात, जेआर स्टील उद्योग बीबीएन में आए। एक उद्योग में ढाई से तीन सौ कामगारों को रोजगार मिला। हर साल बिजली दरें बढ़ती रहीं जो अब अन्य राज्यों में एक समान हो गईं। यहां पर बाहरी राज्यों से आने वाला स्पंज भी रेल कनेक्टिविटी न होने से मंहगा पहुंच रहा है। भाड़ा भी यहां पर देश में सबसे ज्यादा है। पंजाब की मंडी गोबिंदगढ़ और बद्दी से दिल्ली एक समान दूरी पर है। मंडी गोबिंदगढ़ से 1200 रुपये भाड़ा है जबकि बद्दी से 1800 रुपये भाड़ा है। उद्योगपतियों को आश्वासन दिया था कि रेल सुविधा से बद्दी जोड़ा जाएगा। दो दशक बीतने के बाद रेल नहीं आई। यहां से गिल्बर्ट इस्पात, रामा स्टील, आरआर कास्टिंग, रैनी स्टील, अतुल कास्टिंग, कांगड़ा स्टील, देवभूमि इस्पात और जेआर स्टील अपना कोराबार समेट कर दूसरे राज्यों में चले गए।
सरकार ने नहीं बनाई पॉलिसी
एलायज के प्रबंधक संजीव शर्मा ने कहा कि वर्तमान में चल रहे इस्पात उद्योग भी वेंटिलेटर पर हैं। कब बंद हो जाएं किसी को कोई पता नहीं है। जब किसी उद्योगपति को नुकसान होगा तो वह कारोबार क्यों चालू रखेगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने लोहा उद्योग के लिए कोई पॉलिसी नहीं बनाई जिससे उद्योग पलायन कर गए हैं। सरकार से करोड़ों रुपये की बिजली खरीदते थे और लोगों को रोजगार भी दे रहे थे। अब सरकार यदि बिजली की दरों में एक रुपये तक छूट दे तो बचे उद्योग जाने से रुक सकते हैं। वहीं भाड़े को लेकर भी कोई ठोस नीति सरकार को बनानी चाहिए।