सोलन में नई पोर्टेबल एक्स-रे मशीनों में अपलोड हो रहा सिस्टम
जिले के हर स्वास्थ्य खंड को मिलेगी एक मशीन, निक्षय शिविरों में आएगी तेजी
निशिल मेहता
सोलन। स्वास्थ्य विभाग की ओर से चलाए जा रहे टीबी मुक्त अभियान को निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद भी जिले में नियमित रूप से जारी रखा जाएगा। इस संबंध में विभाग ने जिले के सभी चिकित्सा अधिकारियों को निर्देश जारी कर दिए हैं। तैयारियों के तहत अब नई पोर्टेबल एक्स-रे मशीनों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) सिस्टम अपलोड करने का काम तेजी से चल रहा है।
इन नई मशीनों से एक्स-रे लेते ही एआई तुरंत जांच रिपोर्ट तैयार करेगा, जिससे मरीज में टीबी संक्रमण या इसकी संभावना का तत्काल पता चल सकेगा। इससे मरीजों को टेस्ट के कुछ ही समय बाद रिपोर्ट मिल जाएगी और उनका उपचार बिना किसी देरी के शुरू हो सकेगा। एआई डेटाबेस में पहले से ही टीबी से संबंधित एक्स-रे का विशाल डेटा उपलब्ध होने के कारण यह सिस्टम फेफड़ों में टीबी के सूक्ष्म से सूक्ष्म लक्षणों को भी आसानी से पहचान लेगा।
वर्तमान में जिले में इस तरह की दो पोर्टेबल एक्स-रे मशीनों का उपयोग किया जा रहा है। केंद्र सरकार की ओर से स्वास्थ्य विभाग को चार और नई पोर्टेबल एक्स-रे मशीनें मिली हैं। फिलहाल शिमला और अन्य जिलों में इन मशीनों में एआई सॉफ्टवेयर अपलोड किया जा रहा है, जबकि अगले सप्ताह विशेषज्ञों की टीम सोलन पहुंचेगी।
एआई इंस्टॉल होने के बाद जिले के पास कुल छह पोर्टेबल एक्स-रे मशीनें हो जाएंगी। इसके बाद प्रत्येक स्वास्थ्य खंड को एक-एक मशीन सौंप दी जाएगी। इससे ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में लगने वाले निक्षय शिविरों की रफ्तार और बढ़ेगी।
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2030 तक सोलन को टीबी मुक्त बनाने का लक्ष्य
जिले में अब तक करीब 1200 टीबी मरीजों की पहचान की जा चुकी है, जिनका नियमित उपचार जारी है। स्वास्थ्य विभाग ने वर्ष 2030 तक सोलन को पूर्ण रूप से टीबी मुक्त बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसी रणनीति के तहत संदिग्ध मरीजों की जल्द पहचान कर उन्हें नजदीकी स्वास्थ्य केंद्रों और अस्पतालों से जोड़ा जा रहा है।
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विभाग को प्राप्त नई पोर्टेबल एक्स-रे मशीनों में जल्द एआई सिस्टम अपलोड कर दिया जाएगा। इसके बाद इन्हें सभी स्वास्थ्य खंडों को सौंप दिया जाएगा। एआई तकनीक से टीबी मरीजों की शुरुआत में ही पहचान संभव होगी, जिससे समय पर इलाज शुरू हो सकेगा। आम जनता से अपील है कि वे आगे आकर निक्षय शिविरों में अपनी जांच कराएं।
डॉ. अजय पाठक, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, सोलन