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अर्की अस्पताल में इलाज की गारंटी नहीं, चिकित्सकों के कई पद खाली

Mon, 11 Jul 2016 09:50 PM IST
ब्यूरो, अरकी सोलन
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जिला सोलन की सियासत का दुर्ग माने जाने वाले अर्की विधानसभा क्षेत्र के मुख्यालय अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं की दशा कांग्रेस और भाजपा की नाकामी को बयां करती है। - फोटो : अमर उजाला
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जिला सोलन की सियासत का दुर्ग माने जाने वाले अर्की विधानसभा क्षेत्र के मुख्यालय अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं की दशा कांग्रेस और भाजपा की नाकामी को बयां करती है। सियासी दलों की नाकामी के चलते अस्पताल में तालाबंदी की नौबत आ चुकी है। एक चिकित्सक के कंधों पर पूरे अस्पताल की जिम्मेवारी थोप दी है। एक लाख की अधिकांश आबादी सस्ते इलाज की चाह लेकर अर्की सरकारी अस्पताल का रुख कर रहे हैं लेकिन बदले में नहीं मिल रही इलाज की गारंटी। सोमवार को भी कुछ ऐसा ही हुआ। शनिवार और रविवार के अवकाश के बाद जब अस्पताल खुला तो रोगियों की भीड़ को देखने के लिए एक ही चिकित्सक मौजूद रहा। यहां छह चिकित्सकों के पद स्वीकृत हैं। कुछ रोगियों को धक्के खाकर वापस लौटना पड़ा तो कुछ को घंटों इलाज के लिए इंतजार करना पड़ा।
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चिकित्सकों की कमी के अलावा स्टाफ न होने से अल्ट्रासाउंड सेवा भी ठप रही। रोगियों को महंगी कीमतों पर निजी केंद्रों पर अल्ट्रासाउंड करवाना पड़ा। ऐेसे में लोगों में विरोध के स्वर उठना शुरू हो गए हैं। लोगों का कहना है कि अर्की में चिकित्सकों व स्टाफ मुहैया करवाने में हर तरफ से विफलता मिली है।

छह चिकित्सकों के पद स्वीकृत
हैरत है कि डेंटल मिलाकर कुल सात पद चिकित्सकों के स्वीकृत है। लेकिन महज दो पद ही भरें हैं। इसमें एक डेंटल है। सामान्य बीमारी वाला एक ही डॉक्टर तैनात है। हालांकि आस पास के क्षेत्रों से एक चिकित्सक डेप्यूटेशन पर भी बुला लिया जाता है। लेकिन व्यवस्था जस की तस है। यहां से चिकित्सक डेपुटेशन के लिए बुलाया जाता है, वहीं हाल बेहाल हो जाता है।
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कई किमी सफर तय करना मजबूरी
अर्की अस्पताल में बदतर स्वास्थ्य सेवाओं के चलते लोगों को शिमला, सोलन या कुनिहार अस्पताल की तरफ रूख करना पड़ रहा है। कुनिहार की दूरी यहां से करीब 16 किमी है। सोलन 58 और शिमला 37 किमी दूर है। लोगों को ऐसे में आपात स्थिति में भारी परेशानी होती है। खासकर प्रसव के दौरान गर्भवती महिलाओं को शिमला या सोलन रेफर कर दिया जाता है।  

लोगों में पनप रहा भारी रोष
स्थानीय लोगों में चंदू राम, राम शरण, सुदर्शन सिंह, उर्मिला देवी, राजेंद्र कुमार और बाबू लाल ने कहा कि अर्की अस्पताल में पर्याप्त स्टाफ की तैनाती के लिए हर तरफ से प्रयास करके देख लिए। लेकिन सब प्रयास विफल रहे। नगर पंचायत, कांग्रेस पदाधिकारियों का दल, भाजपा का प्रतिनिधिमंडल सबने अर्की अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतरी के लिए प्रयास किए। लेकिन सब विफल रहे हैं। जनता का सब्र का पैमाना भर गया है। एक तरफ सरकार जनता को घर-घर स्वास्थ्य सुविधा देने के दावे कर रही है। अर्की में आबादी बढ़ने के बाद बजाय चिकित्सकों और कर्मचारियों की संख्या घटती जा रही है।

मामला संज्ञान में है : अवस्थी
अर्की मंडल कांग्रेस के पूर्व पीसीसी मेंबर संजय अवस्थी ने कहा कि उनके संज्ञान में मामला है। प्रदेश सरकार को इस संबंध में बताया जा चुका है। स्वास्थ्य मंत्री को भी बताया जा चुका है। चिकित्सकों और स्टाफ की तैनाती के लिए सरकार प्रयासरत है। स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतरी के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।

कांग्रेस सरकार की नाकामी : विधायक
अर्की के भाजपा विधायक गोविंद शर्मा ने कहा कि कांग्रेस सरकार हर मोरचे में विफल रही है। अर्की में स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल हैं। लोगों को मजबूरन इलाज के लिए निजी चिकित्सालयों में जाना पड़ रहा है। अथवा अधिक खर्च करके सोलन, कुनिहार या शिमला अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है। यहां कांग्रेस की नाकामी है।

स्टाफ की तैनाती मांगी : बीएमओ
बीएमओ एसएल वर्मा ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों को समय-समय पर स्टाफ की कमी के बारे में सूचित किया जा रहा है। स्टाफ की तैनाती होते ही व्यवस्थाएं अधिक बेहतर हो जाएंगी। कहा कि डेपुटेशन  पर चिकित्सकों की ड्यूटी बारी-बारी से लगती रहती है। कोशिश होती है कि कोई भी रोगी बिना इलाज के वापस न लौटे।
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