500 से अधिक सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों को आभा आईडी से जोड़ने की प्रक्रिया हो चुकी है पूरी
डिजिटल सुविधाओं के दावे हवा-हवाई, केवल पर्ची बनाने तक सीमित रह गया आभा का इस्तेमाल
निशिल मेहता
सोलन। प्रदेशभर के 500 से अधिक सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों को आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत आभा आईडी से जोड़े महीनों बीत चुके हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट है। दावों के बावजूद प्रदेश में केवल 53 अस्पतालों में ही आभा कार्ड के जरिए सेवाएं मिल पा रही हैं। अन्य अस्पतालों में यह व्यवस्था या तो ठप है या फिर केवल मरीजों की ओपीडी पर्ची बनाने तक ही सीमित होकर रह गई है।
वर्ष 2021 में शुरू हुए आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन का उद्देश्य मरीजों के सभी मेडिकल रिकॉर्ड को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाना था। विभाग ने दावा किया था कि इससे मरीजों को कतारों से मुक्ति मिलेगी और उनका इलाज आसान होगा। हालांकि, नेटवर्क व तकनीकी खामियों, जानकारी के अभाव और कर्मचारियों की भारी कमी के कारण यह योजना परवान नहीं चढ़ पा रही है। यही नहीं, निजी अस्पतालों, मेडिकल स्टोरों और जांच लैब को इस मिशन से जोड़ने का काम भी अधर में अटका हुआ है। इनसेट निजी स्वास्थ्य संस्थानों के साथ जल्द होगी बैठक निजी अस्पतालों और लैब को आभा आईडी नेटवर्क से जोड़ने में आ रही अड़चनों को दूर करने के लिए स्वास्थ्य विभाग अब बैठकें आयोजित करने जा रहा है। इन बैठकों के माध्यम से निजी संस्थानों के प्रतिनिधियों की शंकाओं को दूर किया जाएगा और तकनीकी समस्याओं का समाधान खोजा जाएगा ताकि इस नेटवर्क का विस्तार किया जा सके।
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विभाग की ओर से सभी अस्पतालों में आभा आईडी सेवा पूर्ण रूप से सक्रिय करने की तैयारी चल रही है। निजी अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों को भी इससे जोड़ा जा रहा है। प्रक्रिया पूरी होते ही मरीजों को आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन की सभी आधुनिक सुविधाएं मिलने लगेंगी। - डॉ. अजय पाठक, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, स्वास्थ्य विभाग सोलन