अभिभावकों के आपत्तियों के बाद सभी स्कूलों ने लिया निर्णय
जिले में मात्र 957 किशोरियों ने ही लगाई वैक्सीन, 7503 का था टारगेट
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। स्वास्थ्य विभाग की ओर से चलाए जा रहे ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) वैक्सीन अभियान के तहत स्कूलों में किशोरियों को वैक्सीन लगाने की योजना फिलहाल आगे नहीं बढ़ पाएगी। स्कूलों के प्रधानाचार्यों ने इस संबंध में सहमति नहीं दी है। इसके चलते अब विभाग की ओर से स्कूलों में किशोरियों को एचपीवी वैक्सीन नहीं लगेगी।
बैठक में प्रधानाचार्यों ने योजना को मंजूरी नहीं दी। उनका कहना था कि कई किशोरियों के अभिभावकों ने उनकी पूर्व अनुमति के बिना वैक्सीन लगाने पर आपत्ति जताई है। अभिभावकों की आपत्तियों के बाद स्कूलों ने परिसर में वैक्सीनेशन अभियान नहीं चलाने का निर्णय लिया है। इससे स्वास्थ्य विभाग के लिए निर्धारित लक्ष्य हासिल करना चुनौतीपूर्ण हो गया है।
विभाग के अनुसार, लोगों के मन में एचपीवी वैक्सीन को लेकर कई तरह की भ्रांतियां हैं। कुछ लोग इसे कोरोना वैक्सीन से जोड़कर भी देख रहे हैं। विभाग ने तीन माह के भीतर 7,503 किशोरियों को एचपीवी वैक्सीन लगाने का लक्ष्य रखा था। तीन माह पूरे होने के बाद केवल 900 किशोरियों का ही टीकाकरण हो सका। अब अभियान के करीब पांच माह बाद केवल 957 किशोरियों को ही वैक्सीन लगाई जा सकी है।
जिला कार्यक्रम अधिकारी डॉ. गगन ने बताया कि लोगों में वैक्सीन को लेकर कई तरह की भ्रांतियां हैं। उन्होंने कहा कि यह वैक्सीन सभी आवश्यक परीक्षणों के बाद ही किशोरियों को लगाई जा रही है। कई अभिभावक बेटियों को निजी अस्पतालों में शुल्क देकर भी यह वैक्सीन लगवा रहे हैं, जबकि स्वास्थ्य विभाग इसे निशुल्क उपलब्ध करा रहा है।
डॉक्टरों ने अपनी बेटियों को लगवाई एचपीवी वैक्सीन
इस अभियान की शुरुआत में कई डॉक्टरों ने अपनी बेटियों को एचपीवी वैक्सीन लगवाकर लोगों को जागरूक करने का प्रयास किया था। क्षेत्रीय अस्पताल सोलन के एक शिशु रोग विशेषज्ञ ने भी अपनी बेटी को वैक्सीन लगवाई। विशेषज्ञों का कहना है कि लोगों को वैक्सीन के प्रति फैली भ्रांतियों से बचना चाहिए। उनके अनुसार, यह वैक्सीन किशोरियों को सर्वाइकल कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से बचाने में प्रभावी है।
विभाग की ओर से लोगों और किशोरियों को एचपीवी वैक्सीन के प्रति लगातार जागरूक किया जा रहा है। यह वैक्सीन पहले से ही कई देशों में लगाई जा रही है। सर्वाइकल कैंसर के बढ़ते खतरे को देखते हुए विभाग ने किशोरियों को यह वैक्सीन लगाने का निर्णय लिया है।
-डॉ. अजय पाठक, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, सोलन