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142 अनधिकृत निर्माण, 80 का दावा, एक्ट से पहले बनाए मकान

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सोलन। शहर में चिह्नित किए गए 142 अनधिकृत निर्माण की फिर से की गई जांच में सभी जगह अवैध निर्माण पाया गया है। नगर परिषद ने नोटिस भेजकर अनधिकृत निर्माण करने वालों को दो दिन की मोहलत दी थी। इनमें से 80 भवन मालिकों ने दावा किया है कि उनके निर्माण टीसीपी एक्ट लागू होने से पूर्व के हैं।
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अब परिषद सभी निर्माणों की रि-वेरिफाई कर अंतिम रिपोर्ट तैयार कर रही है, जिसे जिला प्रशासन को सौंपा जाएगा। 30 मई को प्रशासन यह रिपोर्ट हाईकोर्ट में दाखिल करेगा।
गौरतलब है कि नगर परिषद सोलन ने सर्वे रिपोर्ट के आधार पर 163 लोगों को शुरुआत में अनधिकृत निर्माण के नोटिस जारी किए थे। लेकिन, बाद में जांच के दौरान इनमें से 21 को क्लीन चिट दे दी गई। बाकी बचे 142 घरों के नक्शे व निर्माण की फोटोग्राफी नगर परिषद प्रशासन के माध्यम से हाईकोर्ट में सौंपने की तैयारी है जिस पर हाईकोर्ट फैसला लेगा। नगर परिषद ने 19 व 20 मई को सभी अनाधिकृत निर्माण करने वालों को दो दिन की मोहलत दी थी। निर्माण करने वालों को इस मोहलत में साबित करना था कि उनके घर का निर्माण टीसीपी एक्ट लागू होने से पूर्व हो गया था। इसके लिए हाउस टैक्स की रसीद या उस दौरान जमा करवाए गए बिल अथवा नक्शे की कॉपी जमा कराने को कहा गया। इसी कड़ी में शहर भर से 142 में से 80 लोगों ने खुद का निर्माण टीसीपी एक्ट लागू होने से पूर्व करने का दावा किया है। अब नगर परिषद इन 80 लोगों की तरफ से आए जवाब की दोबारा से जांच रही है, जिसके आधार पर ही आखिरी रिपोर्ट तैयार की जा रही है।
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नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी नरेंद्र चौहान का कहना है कि दो दिन में 80 आवेदन उनके पास आए हैं। इनकी छंटनी व दोबारा से जांच हो रही है। तथ्यों के आधार पर विस्तृत रिपोर्ट प्रशासन को सौंपी जाएगी, जहां से 30 मई को हाईकोर्ट में इसे दाखिल किया जाएगा। उन्होंने कहा कि नगर परिषद ने सभी 142 भवनों का कई बार मुआयना कर लिया है। उनके नक्शे व मौजूदा ढांचे की जांच की गई है और सभी में अनाधिकृत निर्माण पाया गया है।
अनाधिकृत निर्माण की जांच के बीच बुधवार को दिनभर मालरोड पर निशानदेही का काम चलता रहा। एसडीएम सोलन समेत नगर परिषद के कार्यकारी अधिकार व अन्य कर्मचारी पैमाइश में जुटे रहे। इस दौरान विवांता मॉल के समीप निशानदेही की गई। मालरोड में कब्जे व अनाधिकृत निर्माण को लेकर हाईकोर्ट पहले ही सख्ती दिखा चुका है। इसके चलते मालरोड में अनाधिकृत निर्माण को तोड़ने के आदेश जारी हुए थे।
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