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गुटों में बंटे मजदूर संगठन इंटक के लोग आमने सामने

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बद्दी में ‌रैली न‌िकालते कामगार। - फोटो : अमर उजाला
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बद्दी (सोलन)। दो गुटों में बंटी इंटक के एक धड़े ने दूसरे धड़े के प्रदेशाध्यक्ष के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए विरोध प्रदर्शन किया। राष्ट्रीय मजदूर कांग्रेस (इंटक) के चुने नुमाइंदों ने इंटक के जिलाध्यक्ष बबलू पंडित की अगुवाई में इंटक के प्रदेशाध्यक्ष हरदीप सिंह बावा के खिलाफ रोष प्रदर्शन किया। बददी में जिलाध्यक्ष के नेतृत्व में एकत्रित हुएसैकड़ों कामगारों ने इंटक प्रदेशाध्यक्ष के खिलाफ जमकर नारेबाजी कर इंटक के नाम पर गुंडागर्दी, 5 साल तक उद्यमियों और कामगारों को गुमराह करने तथा अपनी राजनैतिक रोटियां सेंकने के आरोप लगाए हैं।
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इंटक जिलाध्यक्ष बबलू पंडित ने कहा कि वर्ष 2007 में कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व ने इंटक को भंग कर दिया था। इसके बाद कांग्रेस सुप्रीमो सोनिया गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल कांग्रेस ने इंटक की कमान दिनेश शर्मा सुंदरियाल को सौंपी थी। इंटक की आड़ में प्रदेश की इकाई ने मजदूर हितों को बेचकर जहां उद्योगों से चंदे के रूप में कमाई करके अपनी राजनीति चमकाई। अब इंटक की यह गुंडागर्दी और मजदूर हितों के नाम पर की जाने वाले कथित उगाही अब नहीं चलेगी। इंटक के जिला उपाध्यक्ष वरुण कालिया और दून इंटक अध्यक्ष गुरपाल ने कहा कि श्रमिकों और उद्यमियों में बेहतर तालमेल बनाया जाएगा। इंटक कतई इस हक में नहीं है कि उद्योगों को तंग किया जाए अगर उद्योग चलेंगे तभी मजदूरों के परिवार भी चलेंगे। इंटक का यह प्रयास रहेगा की श्रमिकों और उद्यमियों से बेहतर तालमेल बनाकर मजदूरों को उनका हक दिलाया जाए। इंटक के राष्ट्रीय महासचिव ऋषिकेश वर्मा ने बताया कि वर्ष 2007 में कांग्रेस हाईकमान ने जी संजीवा रेड्डी की इंटक को अवैध घोषित कर दिया था। इसके बाद वर्ष 2012 में संजीवा रेड्डी कोर्ट में भी केस हार गए थे और हाईकोर्ट ने संजीवा रेड्डी की इंटक को अमान्य घोषित कर दिया था। उन्होंने बताया यह मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है जिस पर अभी तक फैसला आना बाकी है। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने अब इंटक की कमान दिनेश शर्मा सुंदरियाल को सौंपी है और हाईकमान के आदेश से पूरे देश में इंटक कांग्रेस के लिए काम कर रही है।

इंटक का है अपना संविधान : बावा
इंटक के प्रदेशाध्यक्ष हरदीप सिंह बावा ने कहा कि इंटक का अपना संविधान है और जो भी प्रदेशाध्यक्ष या जिलाध्यक्ष बनता है चुनाव प्रक्रिया के बाद बनता है। इंटक कांग्रेस के रहमोकर्म से नहीं चल रही बल्कि अपने संविधान से चल रही है। इंटक में राष्ट्रीय नेतृत्व नियुक्तियां नहीं करता बल्कि चुनाव के माध्यम से डेलीगेट चुने जाते है। बीबीएन में चल रही इंटक और राष्ट्रीय स्तर पर चल रही इंटक ये सब अमान्य है।
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