अमर उजाला ब्यूरो
सोलन।
स्वास्थ्य विभाग से सेवानिवृत्त बुजुर्ग महिला को उसका बेटा और बहू लावारिस छोड़ गए। महिला को चलने-फिरने और देखने भी समस्या है। महिला ने प्रशासन उसे वृद्धाश्रम भेजने की गुहार लगाई है। पीड़ित पुष्पा जोशी ने बताया कि पति की बरसों पहले मौत हो चुकी है। वह बेटे के साथ सोलन में किराये के कमरे में रह रही थी। बेटा बद्दी में नौकरी करता था। कुछ साल पहले कंपनी ने बद्दी इकाई को बंद कर दिया। कंपनी असम चली गई। बाद में उन्होंने उसके बेटे को भी असम बुला लिया। बेटा वहां नौकरी करने गया। वह शादी करके लौटा।
महिला के अनुसार बहू शादी के बाद से ही उसे प्रताड़ित करती रही है। यहां उसने किसी उद्योग में नौकरी कर ली। करीब दो माह पूर्व बेटा व बहू दोनों असम चले गए हैं। उसका यहां कोई सहारा नहीं है। बुजुर्ग महिला के अनुसार उसे गठिया है। इसकी वजह से वे चल फिर नहीं सकती है। उसे बिस्तर से शौचालय तक पहुंचने में भी किसी सहारे की जरूरत पड़ती है। दो महीने से मुश्किल से दिन गुजार रही है। महिला ने बताया कि उसे कल्याण विभाग और प्रशासन से राहत की उम्मीद है। उसे किसी ऐसे वृद्धाश्रम भेजा जाए जहां उसका उपचार हो सके और वह ठीक हो जाए।
इस बारे में कल्याण विभाग के एआरओ विकास प्रसाद का कहना है कि नियम के मुताबिक वृद्धाश्रम में वो ही लोग भर्ती किए जाते हैं जो अपनी दिनचर्या खुद कर सकते हों। यदि यह महिला किसी गंभीर रोग से पीड़ित है और चल फिर नहीं सकती है तो उसे वृद्धाश्रम में नहीं रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि वृद्धाश्रम में भर्ती से पूर्व बुजुर्ग का मेडिकल जरूरी है। महिला की परवरिश उसके आश्रितों को ही करनी होगी।