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नेशनल हाइवे पर सौ करोड़ से बन रही सुरंग जांचने पहुंचे एनएचएआई अधिकारी

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एनएच अथॉरिटी ऑफ इंडिया की टीम ने किया बड़ोग में बन रही सुरंग का निरीक्षण, विदेशी तकनीक से भेदा है पहाड़
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डेढ़ साल में बनकर तैयार हुई है सुरंग, अंतिम चरण में कार्य
अमर उजाला ब्यूरो
सोलन।
परवाणू-शिमला राष्ट्रीय राजमार्ग पर रिकॉर्ड समय में तैयार हुई सुरंग का नेशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) की टीम ने मंगलवार को दौरा किया। इस दौरान टीम ने यहां चल रहे कार्यों का जायजा लिया और निर्माता कंपनी को दिशानिर्देश जारी किए। टीम ने सुरंग में हो रहे कार्य पर संतोष जताया है। आगामी करीब छह माह में यह पूरी तरह बनकर तैयार हो जाएगी। टीम के प्रभारी प्रकाश दरोच ने बताया कि सुरंग के दोनों सिरे खुल चुके हैं। सुरंग के अंदर अब नालियां बनाने का काम चल रहा है।
विदेशी तकनीक के आधार पर बनाई जा रही इस सुरंग में पानी नहीं टपकेगा। पानी नालियों के माध्यम से बाहर लाया जाएगा। गौरतलब है कि करीब सौ करोड़ रुपये से फोरलेन हाइवे पर सोलन-कुमारहट्टी के बीच बड़ोग में सुरंग का निर्माण किया है। करीब एक किलोमीटर लंबी यह सुरंग महज डेढ़ साल में बनकर तैयार हो गई है। सुरंग बनने से नेशनल हाइवे पर चंडीगढ़ की तरफ जाने वाले वाहनों की छह किलोमीटर तक दूरी कम होगी। एक तरफा वाहन सुरंग से होकर गुजरेंगे। कंपनी ने निर्माण के दौरान आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया है। इसकी वजह से यहां निर्माण कार्य में कोई हादसा नहीं हुआ। समय-समय पर एनएचएआई प्रबंधन कार्य की जांच करता रहा है व कंपनी प्रबंधन को उचित दिशानिर्देश भी दिए हैं। इस मौके पर टीम के अन्य सदस्य वरिष्ठ सुरंग विशेषज्ञ अरविंद कुमार शर्मा और क्वालिटी सुपरवाइजर निर्दोष तोमर भी मौजूद थे।
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फोरलेन पर अब तक 250 करोड़ खर्च
फोरलेन के पहले चरण में परवाणू से चंबाघाट तक करीब 39 किलोमीटर लंबे मार्ग को चौड़ा करने में 748 करोड़ रुपये के बजट रखा है। इसमें से सौ करोड़ रुपये सुरंग निर्माण पर खर्च होने हैं। अभी तक कंपनी 250 करोड़ रुपये खर्च कर चुकी है। करीब दो साल तक निर्माण कार्य आगे जारी रहेगा।
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चार साल तक होगी कंपनी की जवाबदेही : एनएचएआई
एनएचएआई परामर्श टीम प्रभारी प्रकाश दरोच ने बताया कि सुरंग निर्माण के बाद चार साल तक इसकी देखरेख की जिम्मेदारी निर्माता कंपनी की होगी। यदि सुरंग में किसी भी तरह की कोई परेशानी आती है तो उसके लिए कंपनी जिम्मेदार मानी जाएगी। कंपनी के साथ अनुबंध में निर्माण कार्य पूरा होने के चार साल बाद तक देखरेख का समय तय किया है।
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