बद्दी (सोलन)। फार्मा हब के रूप में उभरे प्रदेश के उद्योग जगत को नई सरकार से कई उम्मीदें हैं। देश में जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर) की व्यवस्था लागू होने के बाद दिक्कतें झेल रहे उद्योगपतियों को राहत की आस है। सबसे बड़ी राहत उद्योगों को जीएसटी के तहत इनपुट क्रेडिट के एवज में दी जाने वाली धनराशि के रिफंड होने की उम्मीद है।
जीएसटी लागू होने के बाद उद्योगपतियों को 100 फीसदी क्रेडिट इनपुट में से केंद्र सरकार द्वारा 58 फीसदी रिफंड दिया जाता था तथा शेष 42 फीसदी रिटर्न प्रदेश सरकारों को देने के निर्देश दिए थे। लेकिन प्रदेश की पूर्व सरकार ने न तो इसे रिफंड किया और न ही इसे देने से इनकार किया था। अब प्रदेश में हुए सत्ता परिवर्तन के बाद केंद्र और प्रदेश में एक दल की सरकार बनने से उद्योग जगत को इस 42 फीसदी इनपुट क्रेडिट रिटर्न का लाभ मिलने की संभावनाएं बढ़ गई हैं।
यही नहीं वर्ष 2003 में प्रदेश को मिले औद्योगिक पैकेज के बाद औद्योगिक नगरी बीबीएन में रिकार्ड औद्योगिकीकरण हुआ है। प्रदेश को सर्वाधिक 63 फीसदी का राजस्व इसी क्षेत्र से मिलता है। इस क्षेत्र को रेलवे सुविधा से जोड़ने की कई सालों से कवायद चल रही है। बद्दी में बाकायदा इसके लिए कंटेनर डिपो भी खुल गया है लेकिन रेलवे सुविधा आज तक नहीं मिली। हरियाणा और हिमाचल में भाजपा की सरकार होने से इस रेल ट्रैक के भी जल्द बिछने की आस है। यह रेल ट्रैक कालका-चंडी से होते हुए बद्दी को जोड़ेगा। रेलवे लाईन के सर्वेक्षण के लिए आंकी कुल 385.75 करोड़ राशि में 177.67 करोड़ रुपये जारी भी हो चुके हैं। लेकिन सात किलोमीटर रेल ट्रैक के लिए 345.13 बीघा भूमि का अधिग्रहण अभी नहीं हो पाया है। इस वजह से मामला अटका पड़ा है। लेकिन अब दोनों राज्यों में और केंद्र में एक दल की सरकार होने से इस प्रोजेक्ट के जल्द पूरा होने की आस है।
हरियाणा के चंडी मंदिर से होकर बद्दी तक करीब 25 किलोमीटर रेलवे लाइन बनाने के लिए करीब 18 किमी जमीन हरियाणा सरकार के तहत और सात किलोमीटर जमीन हिमाचल की है। हरियाणा सीमा के बाद बद्दी के लिए बनने वाले करीब सात किलामीटर रेलवे ट्रैक के लिए नौ गांवों की लगभग 345.13 बीघा भूमि का प्रदेश सरकार ने आधे-आधे शेयर के हिसाब से अधिग्रहण करना है।
निवेश बढ़ाने का किया जाए प्रयास : संघ
औद्योगिक संघ बीबीएनआईए के अध्यक्ष शैलेष अग्रवाल ने कहा कि हिमाचल में भाजपा की सरकार बनने से उद्योग जगत को लाभ मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि नई सरकार को चाहिए कि वह औद्योगिक क्षेत्र में मूलभूत सुविधाओं में इजाफा करें और औद्योगिक निवेश बढ़ाएं। स्थापित उद्योगों का पलायन रोकने के लिए नई योजनाएं क्रियान्वित की जानी चाहिए।