पुराने बस अड्डे से चंबाघाट तक वॉकिंग ट्रेल की डीपीआर नगर परिषद ने तैयार कर ली है। 72 लाख की डीपीआर में कम से कम सैन्य भूमि के इस्तेमाल की सिफारिश की है ताकि जमीनी मंजूरी का कोई अड़ंगा न लगे। इसका खुलासा वॉकिंग ट्रेल के निर्माण को लेकर आयोजित बैठक में हुआ हैै। इसकी अध्यक्षता सैन्य और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में मंत्री धनीराम शांडिल ने की।
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता तथा सैनिक कल्याण मंत्री कर्नल धनीराम शांडिल ने कहा कि सोलन शहर में पुराने बस अड्डे से चंबाघाट तक निर्मित किए जाने वाले पैदल पथ का निर्माण शीघ्र शुरू होगा। इस कार्य पर लगभग 72 लाख रुपये खर्च होंगे। इससे जहां छात्रों और यात्रियों को लाभ मिलेगा वहीं इसके निर्माण से वाहनों की आवाजाही भी सकारात्मक रूप से सुनिश्चित होगी।
उन्होंने कहा कि लगभग 1.5 किलोमीटर लंबे इस पथ के निर्माण के लिए जिला प्रशासन तथा सैन्य प्रशासन में सहमति है। राजस्व विभाग द्वारा समुचित निशानदेही के उपरांत इस निर्माण के मध्य आ रही सैन्य भूमि की पूरी जानकारी मिलने पर जिला प्रशासन इस संबंध में सैन्य प्रशासन को अवगत करवा दिया जाएगा।
बैठक में प्रशासन की ओर से एसडीएम एकता कापटा ने बताया कि जिला प्रशासन एवं सैन्य प्रशासन के मध्य भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया जारी है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में राजस्व विभाग की ओर से सभी औपचारिकताएं पूरी कर विस्तृत रिपोर्ट जिला दंडाधिकारी सोलन को सौंप दी है।
बैठक में मेजर क्षितिज सलवान, लोक निर्माण विभाग राष्ट्रीय राजमार्ग के अधिशाषी अभियंता योगेश राउत, लोनिवि के अधिशाषी अभियंता विजय चौहान, नगर परिषद सोलन के कार्यकारी अधिकारी बीआर नेगी, नायब तहसीलदार सोलन आरके जिंटा, फोरलेन कार्य के निर्माण में संलग्न कंपनी के प्रतिनिधि एवं अन्य संबद्ध विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
सर्विस लेन का रखें ध्यान : चंदेल
सेना की ओर से कर्नल अशोक चंदेल ने भूमि हस्तांतरण प्रक्रिया में रक्षा मंत्रालय के विभिन्न मापदंडों की जानकारी प्रदान की। उन्होंने आग्रह किया कि विभिन्न प्रक्रियाओं को रक्षा मंत्रालय के वर्ष 2015 में जारी निर्देशों के अनुरूप पूरा किया जाए। राष्ट्रीय राजमार्ग पर सेना को सर्विस लेन एवं रास्ता उपलब्ध करवाने के लिए मापदंड राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखकर ही बनाए हैं। आश्वासन दिया कि सेना भूमि हस्तांतरण के लिए पूरा सहयोग प्रदान करेगी।