नालागढ़ (सोलन)। औद्योगिक हब बीबीएन के तहत सबसे बड़े सरकारी नालागढ़ अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा गईं हैं। यहां कहने को तो चिकित्सक पूरे हैं लेकिन विशेषज्ञ चिकित्सकों का अभाव है। इसमें से सबसे अधिक महत्वपूर्ण पद रेडियोलॉजिस्ट का खाली चल रहा है। चार माह से इस पद के खाली होने से मरीजों सहित गर्भवती महिलाओं को अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है।
अस्पताल में प्रतिदिन आने वाले मरीजों में से कई मरीजों के अल्ट्रासाउंड करवाए जाते हैं। लेकिन अस्पताल में यह सुविधा आज मरीजों को नहीं मिल पा रही है, जिससे मरीजों को निजी अस्पतालों और सेंटरों में अल्ट्रासाउंड करवाने को विवश होना पड़ रहा है। हालांकि अस्पताल प्रशासन की ओर से गर्भवती महिलाओं के अल्ट्रासाउंड बेशक बाहर करवाए जा रहे है, लेकिन इसका खर्च अस्पताल प्रशासन की ओर से दिया जा रहा है। नालागढ़ अस्पताल में अगस्त माह से रेडियोलॉजिस्ट का पद भी खाली चल रहा है। अस्पताल में इससे पहले दो रेडियोलॉजिस्ट तैनात थे लेकिन इसमें एक सेवानिवृत्त हो टुका है। दूसरा प्रमोशन के बाद स्थानांतरित हो गया है।
नालागढ़ अस्पताल उपमंडल का सबसे बड़ा अस्पताल है और यहां दूरदराज और पहाड़ी क्षेत्रों से मरीज उपचार करवाने आते है। प्रतिदिन 700 से 800 ओपीडी वाले इस अस्पताल में प्रतिदिन दर्जनों लोगों के अल्ट्रासाउंड किए जाते है, जिसमें आम लोगों सहित गर्भवती महिलाओं के अल्ट्रासाउंड शामिल हैं। अस्पताल में अल्ट्रासाउंड 100 रुपये में हो जाता है, लेकिन बाहरी व निजी अस्पतालों सहित सेंटरों में 300 से 400 रुपये में अल्ट्रासाउंड होता है। खंड चिकित्साधिकारी डॉ. केडी जस्सल ने कहा कि रिक्त पदों की सूचना समय-समय पर विभाग को दी जाती है। नेशनल प्रोग्राम के तहत गर्भवती महिलाओं के अल्ट्रासाउंड निशुल्क करवाए जा रहे हैं।
अस्पताल में एनेस्थीसिया डॉक्टर
न होने से ओटी सुविधा भी चौपट
नालागढ़ (सोलन)। नालागढ़ अस्पताल प्रबंधन अपने घर अंधेरा करके दूसरे के घर रोशन कर रहा है। दरअसल अस्पताल में तैनात एनेस्थीसिया (बेहोश) चिकित्सक को यहां से प्रतिनियुक्ति पर जिला अस्पताल भेज दिया है। इस कारण यहां ऑपरेशन नहीं हो रहे। अस्पताल में कई विशेषज्ञ हैं जो यहां आपरेशन करते हैं लेकिन एनेस्थीसिया विशेषज्ञ न होने के कारण मरीजों के आपरेशन टालने पड़ते हैं। ऐसे में नालागढ़ अस्पताल में एनेस्थीसिया विशेषज्ञ की भी सेवाएं पूरी नहीं मिल पा रही। इसके अलावा अस्पताल में कई विशेषज्ञ चिकित्सकों के महत्वपूर्ण पद खाली चल रहे हैं जिसमें से हड्डी रोग विशेषज्ञ, बाल रोग विशेषज्ञ के पद खाली है। ऐसे में हड्डी रोगों और बच्चों की बीमारी के कारण लोगों को निजी या फिर पड़ोसी राज्यों के अस्पतालों का रुख करना पड़ता है।