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दो वर्षो के बाद भी सोलन में नहीं शुरू हुआ मातृत्व एवं शिशु केंद्र भवन का निर्माण

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दो वर्ष बाद भी मातृत्व एवं शिशु केंद्र भवन का निर्माण लटका
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सोलन में दो वर्षों से प्रस्तावित है दस करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले भवन का काम
एनएचएम टीम की ओर से चयनित जमीन का निरीक्षण करने के बाद शुरू होगा कार्य
अमर उजाला ब्यूरो
सोलन। क्षेत्रीय अस्पताल सोलन में 10 करोड़ से प्रस्तावित मातृत्व एवं शिशु केंद्र भवन का निर्माण की योजना अधर में है। केंद्र सरकार इसके लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत करीब दो करोड़ रुपये जारी किए हैं। इसके लिए क्षेत्रीय अस्पताल सोलन के साथ खाली पड़ी जमीन चिह्नित की गई है। योजना को केंद्र से मंजूर हुए करीब दो वर्ष का समय बीत चुका है लेकिन चयनित जमीन का अभी तक एनएचएम की टीम ने निरीक्षण नहीं किया। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की साइट सिलेक्शन कमेटी की मंजूरी के बाद ही मातृत्व एवं शिशु केंद्र भवन का निर्माण शुरू हो पाएगा। केंद्र सरकार की तरफ से भवन निर्माण के लिए दो करोड़ की किश्त भी जारी हो चुकी है। इंतजार एनएचएम की टेक्निकल कमेटी की मंजूरी का है। योजना के तहत गर्भवती महिलाओं व नवजात बच्चों को एक ही छत के नीचे आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवाने के उदे्श्य से अस्पताल परिसर के समीप कर्मचारी आवासीय बिल्डिंग को तोड़कर मातृत्व एवं शिशु केंद्र का निर्माण किया जाना है।
रोजाना 200 महिलओं की लगती है ओपीडी
अस्पताल में रोज औसतन 200 गर्भवती महिलाएं स्वास्थ्य जांच करवाने पहुंचती हैं। अस्पताल में हर महीने औसतन 400 डिलीवरी होती हैं। इस दृष्टि से अस्पताल की गायनी ओपीडी व वार्ड में काफी भीड़ रहती है। नवजात बच्चों के उचार के लिए भी शिमला व सिरमौर के दूरदराज के क्षेत्रों के अभिभावक सोलन अस्पताल आना ही बेहतर समझते हैं। अस्पताल में रोज औसतन 300 बच्चे उपचार के लिए आते हैं। इसमें करीब सौ बच्चे एक साल से कम आयु के होते हैं। मातृत्व एवं शिशु वार्ड में एक से कम आयु के बच्चों के लिए अलग वार्ड बनेगा। भवन बनते ही अस्पताल का गायनी व चिल्ड्रन वार्ड एक ही छत के नीचे शिफ्ट होगा। मातृत्व एवं शिशु केंद्र में अस्पताल का लेबर रूम और नवजात बच्चों की स्पेशल केयर यूनिट भी शिफ्ट होगी।
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योजना के संचालन के लिए मिलेगा अलग स्टाफ
मातृत्व एवं शिशु खंड के संचालन के लिए सरकार से अलग स्टाफ देगी। इसमें गायनी स्पेशलिस्ट के अलावा चाइल्ड स्पेशलिट, स्टाफ नर्स की सेवाएं शामिल हैं। मातृत्व एवं शिशु केंद्र में 50 बेड की सुविधा रहेगी। इसमें लेबर रूम, स्पेशल केयर यूनिट भी शिफ्ट की जाएगी। अस्पताल में इस समय गायनी व चिल्ड्रन वार्ड अलग-अलग ब्लॉक में हैं। बच्चों की स्पेशल केयर यूनिट भी गायनी वार्ड से काफी दूर है। यदि डिलीवरी के बाद गायनी वार्ड में एडमिड महिला के बच्चे को स्पेशल केयर की जरूरत पड़े तो बच्चे की फीडिंग के लिए काफी दूरी तय करनी पड़ती है। मातृत्व एवं शिशु खंड बनने से इस प्रकार की समस्या से निजात मिलेगी।
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टेक्निकल कमेटी की मंजूरी के बाद होगा कार्य शुरू
सीनियर मेडिकल सुपरिंटेंडेंट सोलन डॉ. महेश गुप्ता ने बताया कि अस्पताल में प्रस्तावित मातृत्व एवं शिशु केंद्र के निर्माण को केंद्र सरकार से दो करोड़ की राशि मिल चुकी है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की टेक्निकल कमेटी की मंजूरी के बाद चयनित जमीन पर भवन का निर्माण हो सकेगा।
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