सोलन। जीएसटी लागू होने के बावजूद कारोबारियों को दोहरी परेशानी झेलनी पड़ रही है। जीएसटी लागू करते वक्त तर्क दिया था कि व्यापारियों को अलग से कोई फाइल तैयार नहीं करनी पड़ेगी। लेकिन इसके बावजूद कारोबारियों को जीएसटी के अलावा मार्केट फीस अलग से देनी पड़ रही है। मार्केट फीस को लेकर हिमाचल अधिसूचित क्षेत्र में शामिल है। इसमें तय है कि ऐसे कारोबारी जिनकी एक साल में तीन लाख 60 हजार का कारोबार है या इससे अधिक है उन्हें एक फीसदी मार्केट देनी पड़ेगी। व्यापारी वर्ग में अब मार्केट फीस का विरोध शुरू हो गया है।
यही नहीं दालों, अंडे, मास, मसाले और चावल सहित अन्य 131 वस्तुओं के क्रय और विक्रय का हिसाब किताब अलग रखना होगा। इसकी पूरी डिटेल व्यापारियों को विपणन समिति के बाद देनी होगी। इसके चलते व्यापारियों को जीएसटी सहित मार्केट फीस के लिए दो फाइलें तैयार करना पड़ रही है। इस कारण होल सेल के व्यापारियों को सबसे अधिक परेशानी हो रही है। व्यापारियों को जीएसटी के अलावा एक फीसदी मार्केट फीस भी देना पड़ रही है। कारोबारियों ने कहा कि उन्हें जीएसटी से कोई परेशानी नहीं है। इसके तहत सिर्फ उन्हें अपने उत्पादों के हिसाब की एक ही फाइल बनानी थी। लेकिन इसके बावजूद उन पर अलग से मार्केट फीस थोपने से उनका काम बढ़ गया है। इस कारण उन्हें परेशानी झेलनी पड़ रही है। लिहाजा इसे खत्म किया जाए।
राहत के नाम पर लोगों से धोखा
व्यापारियों ने कहा कि मार्केट फीस के नाम पर कारोबारियों से मनमानी की जा रही है। वह भी उस उत्पादन पर जिन्हें जीएसटी से दूर रखा है। उन्होंने बताया कि लोगों के सामने दाल, चावल, अंडा, दूध और शकर को जीएसटी से बाहर रखा है। लेकिन दूसरी तरफ एक फीसदी मार्केट फीस थोप दी है। इसका बोझ भी उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है। यही नहीं व्यापारियों को जीएसटी और मार्केट फीस का हिसाब रखने के लिए फाइलें भी दो-दो बनाना पड़ रही हैं।
मुख्यमंत्री के समक्ष उठाएंगे मुद्दा : गुप्ता
व्यापारमंडल के अध्यक्ष मुकेश गुप्ता ने बताया कि जीसीटी शुरू होने के बाद कारोबारियों को दोहरी परेशानी झेलनी पड़ रही है। एक ओर जीएसटी लगाया है तो दूसरी ओर मार्केट फीस वसूलना शुरू कर दी है। रिकार्ड बनाना भी मुश्किल हो रहा है। इस बारे में व्यापारमंडल पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह को भी पत्र लिख चुका है। लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। अब व्यापारमंडल नवनियुक्त मुख्यमंत्री जयराम से मिलेगा।
फीस न देने पर जुर्माने का है प्रावधान : कश्यप
कृषि उपज मंडी समिति सोलन के सचिव प्रकाश कश्यप ने बताया कि मार्केट फीस को हिमाचल में अधिसूचित किया है। इसमें 131 वस्तुओं के क्रय-विक्रय पर एक फीसदी मार्केट फीस लागू है। इसमें ऐसे व्यापारी आते हैं जिनका इन वस्तुओं का सालाना कारोबार तीन लाख 60 हजार या इससे अधिक का है। इन कारोबारियों को मार्केट कमेटी के पास अपना नाम दर्ज करवाना जरूरी है। यदि इस फीस को निर्धारित समय पर जमा न करवाया जाए तो कारोबारी को 14 दिन के बाद अतिरिक्त फाइन के साथ फीस जमा करना पड़ती है। साथ ही कारोबारियों को यह भी हिसाब देना होता है कि किस वस्तु का कितना कारोबार किया है।