नालागढ़ (सोलन)। परवाणू के बाद अब नालागढ़ शहर भी डेंगू की चपेट में आ गया है। स्वास्थ्य विभाग के लगातार परीक्षणों से यहां लोगों में बड़े पैमाने पर इस गंभीर बीमारी के लक्षण मिल रहे हैं। रोजाना लगभग एक मरीज में डेंगू होने की पुष्टि हो रही है। नालागढ़ अस्पताल में अब तक 27 मामले पॉजीटिव पाए जा चुके हैं। तेजी से बढ़ते इन मामलों की वजह से स्वास्थ्य विभाग के भी हाथ-पांव फूलने लगे हैं। जिला में डेंगू की रोकथाम में स्वास्थ्य विभाग नाकाम साबित हुआ है। कई बड़ी बैठकों के बावजूद डेंगू को रोकने के लिए उचित कदम नहीं उठाए जा सके हैं।
सरकारी अस्पताल में एलीजा विधि से हुए टेस्टों में यदि डेंगू के पाजिटिव केस मिलना पुख्ता प्रमाण माना जाता है। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि एलीजा विधि से डेंगू सही ढंग से डिटेक्ट होता है क्योंकि एलीजा विधि से होने वाले टेस्ट में एक्यूरेसी अधिक रहती है। एलीजा टेस्ट के साथ ब्लड के भी सैंपल लिए जाते हैं जिस पर प्लेटलेट्स कम पाए जाने पर उपचार तुरंत शुरू कर दिया जाता है। डेंगू प्रतिदिन लोगों में डिटेक्ट हो रहा है और 10 दिनों के भीतर 9 नए मामले डेंगू के एलीजा विधि से सामने आए हैं।
डेंगू से बचाव के लिए करें उपाय
एमडी मेडिसिन डॉ. अनुज गुप्ता ने कहा कि डेंगू बुखार एक अलग किस्म के मच्छर के काटने से होता है। यह मच्छर दिन के समय ही लोगों को अपना शिकार बनाता है। यह मच्छर अन्य मच्छरों की अपेक्षा आकार में बड़ा व धारीदार होता है। इसमें मरीज को तेज बुखार, सिरदर्द, भूख न लगना और शरीर में दर्द होना आदि लक्षण होते हैं। इनसे रोकथाम के लिए साफ सफाई का होना बहुत जरूरी है। पानी एक जगह पर जमा नहीं होना चाहिए। बर्तनों को ढककर रखें और मच्छरदानियों का प्रयोग करें।
स्वास्थ्य विभाग कर रहा जागरूक : जस्सल
खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. केडी जस्सल ने कहा कि अस्पताल में एलीजा विधि से हुए टेस्टों की रिपोर्ट के तहत अब तक 27 मामले डेंगू के पाजिटिव पाए गए हैं। इन्हें उपचार दे दिया है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य मंत्री द्वारा जारी आदेशों के तहत जागरूकता अभियान को और तेज किया है। टीमें जगह-जगह जाकर लोगों को जागरूक बनाने में जुटी हुई है।