दाड़लाघाट में सरकारी स्कूल गुणात्मक शिक्षा के सरकारी दावों की हवा निकाल रहे हैं।
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दाड़लाघाट में सरकारी स्कूल गुणात्मक शिक्षा के सरकारी दावों की हवा निकाल रहे हैं। वार्षिक परीक्षाओं के लिए मात्र चार माह का समय शेष है और शिक्षा खंड धुंदन तथा अर्की के तहत आने वाले सरकारी स्कूलों में लंबे समय से अध्यापकों के अधिकतर पद खाली चल रहे हैं। हालात यह है कि खाली पदों वाले स्कूलों में वेलफेयर फंड पर स्थानीय युवाओं को पढ़ाने के लिए बुलाना पड़ रहा है। कई स्कूलों में तो बच्चों की पढ़ाई सुचारु रूप से चलाने के लिए 100 रुपये तक फीस वसूल कर सरेआम शिक्षा के अधिकार अधिनियम की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। क्षेत्र में एक स्कूल की हालत तो यहां तक खराब है कि अध्यापक न होने से कई कक्षाओं में एक भी बच्चा नहीं है।
बच्चों को घर द्वार के स्कूलों को छोड़ कर दूर के दूसरे स्कूलों में जाकर दाखिला लेना पड़ा है। दूर के स्कूलों तक सफर में ही बच्चों की ऊर्जा और पैसा लग रहा है। जानकारों की माने तो स्कूल प्रबंधन समिति द्वारा अध्यापकों की नियुक्ति पर सरकार की रोक के बाद भी समस्या अधिक जटिल हुई है।
अभिभावकों को बच्चों के भविष्य की चिंता सता रही है। उनका कहना है सरकार शिक्षा के स्तर को सुधारने के लिए संवेदनशील नहीं है। सरकारी स्कूलों में स्टाफ की भारी कमी से दिनोंदिन बच्चों की घटती तादात सरकार की बेरुखी को दर्शाती है। भले ही सरकार गुणात्मक शिक्षा प्रदान करने के लाख दावे करे लेकिन वास्तविकता ठीक इसके उलट है। यदि सरकार खुद खली पदों को नहीं भर सकती तो स्कूल प्रबंधन समिति को ही अध्यापक नियुक्त करने की शक्ति प्रदान करें।
कहां कितने पद रिक्त
उच्च शिक्षा प्रदान करने वाले स्कूलों की बात करें तो विधानसभा क्षेत्र के 29 स्कूलों में 57 विभिन्न विषयों के प्रवक्ताओं और डीपी के पद लंबे समय से रिक्त चल रहे हैं। निजी कंपनी द्वारा नियुक्त कंप्यूटर प्रवक्ता कई माह से हड़ताल पर हैं, इनके 20 पद खाली हैं। 13 वरिष्ठ माध्यमिक स्कूलों में वाणिज्य और विज्ञान विषय पढ़ाया जा रहा है। इन स्कूलों में भी 10 पद वाणिज्य और तीन पद रसायन और जीव विज्ञान विषय के लंबे अरसे से रिक्त हैं। क्षेत्र में शिक्षा की नींव माने जाने वाली 202 प्राथमिक और 44 माध्यमिक स्तर की पाठशालाएं चल रही हैं। इनमें भी जेबीटी, सीएंडवी के पद खाली हैं। टीजीटी के कुल 35 रिक्त पड़े हैं। इनमें 25 आर्ट्स, 5 मेडिकल, 5 नॉन मेडिकल के पद शामिल हैं।
रिक्त पदों को जल्द भरा जाएगा
उच्च शिक्षा विभाग के उपनिदेशक राकेश भारद्वाज और उपनिदेशक प्रारंभिक शिक्षा कमल मेहरा ने कहा कि विभाग खाली पदों को भरने के प्रति गंभीर है। खाली पदों को भरने के लिए प्रभावी प्रयास किए जा रहे हैं।