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बद्दी में 18 साल बाद कांग्रेस के हाथ से फिसली नप अध्यक्ष की कुर्सी

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सुरेंद्र शर्मा

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बद्दी (सोलन)। प्रदेश की सबसे अमीर अज्ञैर बहुचर्चित बद्दी नगर परिषद से कांग्रेस और चौधरी परिवार का तिलिस्म आखिर 18 साल बाद टूट ही गया। कांग्रेस ने कुर्सी बचाने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगाया लेकिन 16 दिन में वह भाजपा का कोई भी पार्षद अपने पाले में नहीं कर सकी। कभी लुबाणा समुदाय में रिश्ते नातों की दुहाई दी तो कभी दोस्ती व्यापार की बात की लेकिन कांग्रेस नप अध्यक्ष मदन लाल की कुर्सी बचाने को कोई भी तिकड़म काम नहीं आई। जल बोर्ड के चेयरमैन दर्शन सैणी और विधायक परमजीत सिंह अपने पार्षदों को एकजुट रखने में सफल रहे।

पंजाब के प्रसिद्ध जिंदा साहिब नूरपुर बेदी रोपड़ में सौगंध खाने के बाद भाजपा के पांचों पार्षद अज्ञातवास में चले गए थे जो शनिवार को ही प्रकट हुए। कांग्रेसी संपर्क करते भी तो कैसे करते। जल बोर्ड के चेयरमैन दर्शन सैणी और विधायक परमजीत सिंह पम्मी की डबल इंजन जोड़ी ने ऐसी बिसात बिछाई जिसे कांग्रेसी भेद नहीं सके। नप के प्रधान मदन चौधरी ने फ्लोर टेस्ट का सामना करने से पहले हाईकोर्ट का भी रुख किया ताकि उनकी कुर्सी बच जाए लेकिन वहां से ज्यादा राहत नहीं मिली।
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इन 16 दिनों में मदन ने इस्तीफा भी नहीं दिया और अपनी करारी हार सामने देखकर भी फ्लोर टेस्ट से गुजरने की जिद्द की जिस पर उनको मुंह की खानी पड़ी। हालांकि उनको पहले ही पता था कि अब बाजी उनके हाथों से निकल चुकी है लेकिन कभी कोर्ट और कभी अन्य सहारा लेकर उन्होंने अपना सिंहासन बचाने का नाकाम प्रयास किया। राज्य में सत्ता बदलने व वक्त की मार के आगे उनकी एक न चली और फ्लोर टेस्ट पर पिटने के बाद उनको हथियार डालने पड़े। हिमाचल की बहुचर्चित नगर परिषद बद्दी में पिछले 18 वर्षों कांग्रेस एक छत्र राज रहा जिसका आज अंत हो गया।

2001 में बद्दी को नगर पंचायत का दर्जा मिला था। उस समय दून के कांग्रेस समर्थित पूर्व सीपीएस चौधरी लज्जाराम विधायक थे। पहले ही चुनाव में उनके बेटे मदन लाल चौधरी ने नगर पंचायत के पार्षद का चुनाव चुनाव लड़ा। वह विजयी होकर नगर परिषद के अध्यक्ष की कुर्सी पर विराजमान हुए। उसके बाद 2005 में महिला आरक्षित सीट घोषित हुई तो मदन लाल ने अपनी धर्मपत्नी भूपेंद्र कौर को चुनावी रण में उतार कर विजय हासिल की। वह नगर परिषद अध्यक्ष की कुर्सी पर विराजमान हुई।

2010 में सीधे अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का पार्टी निशान पर चुनाव हुआ। इसमें मदन चौधरी फिर विजयी हुए। उसके अगले चुनाव 2015 में कांग्रेस समर्थित पांच पार्षद जीतकर आए। वह भाजपा समर्पित चार पार्षद जीते लेकिन तीन वर्ष बीतने के बाद कांग्रेस समर्थित नरेंद्र कुमार दीपा ने भाजपा पार्षदों के साथ हाथ मिलाकर चौधरी परिवार की चूलें हिला दीं। पिछले 16 दिन से चल रहे राजनीतिक नाटक का आज पटाक्षेप हो गया।
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पिछले 16 दिन से भूमिगत पांचों पार्षद शनिवार को 11 बजने से ठीक 10 मिनट पहले नगर परिषद हॉल में पहुंचे। उन्होंने चौधरी मदन लाल के विरुद्ध मतदान कर दिया। अब नगर परिषद बद्दी में भगवा लहराना तय है लेकिन अबकी इस बार फिर से दोनों दलों को फ्लोर टेस्ट से गुजरना है और नया अध्यक्ष चुनना है।

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