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औचक निरीक्षण पर भड़के उद्योगपति, किशनपुरा में हंगामा

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अमर उजाला ब्यूरो

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बद्दी (सोलन)। पिछले दो दिन से आयुर्वेद विभाग की छापामारी से उद्योगपति आहत हैं। बुधवार को विभिन्न उद्योग संगठनों की आपात बैठक में विभाग की इस कार्रवाई को सर्जिकल स्ट्राइक की संज्ञा दी। उन्होंने कहा कि सरकार छोटे उद्योगों को बढ़ावा देने के बजाय उन्हें डरा-धमका कर बंद करने पर उतारू हो गई है। आयुर्वेद विभाग के नियमों की जटिलता के चलते पिछले कुछ सालों में करीब सवा सौ उद्योग बंद हो चुके हैं। बुधवार को किशनपुरा के एक होटल में प्रदेश आयुर्वेद ड्रग मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन, बीबीएन आयुर्वेद ड्रग मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन, सिरमौर आयुर्वेद ड्रग मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन और लघु उद्योग भारती के करीब दो दर्जन उद्योगपतियों ने आपात बैठक की।

इसमें बीते सोमवार और मंगलवार को आयुर्वेदिक दवा उत्पादकों के खिलाफ की गई कार्रवाई की कड़ी भर्त्सना की। बैठक में बताया गया कि आयुर्वेद विभाग ने करीब एक दर्जन तीन सदस्यीय टीमों का गठन कर प्रदेश के आयुर्वेद उद्योगों पर औचक छापे मारे। इसमें उन्हें डराया-धमकाया और धमकी दी गई कि उनका उद्योग बंद करवा दिया जाएगा। उनका आरोप है कि इस दौरान उनके साथ अभद्र भाषा का भी इस्तेमाल किया गया। उद्योगपतियों ने कहा कि इस कार्रवाई से आयुर्वेद दवा उद्योगों में सर्जिकल स्ट्राइक जैसा माहौल बना दिया गया।
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आरोप है कि इस पूरी कार्रवाई के दौरान अधिकारियों का उद्योगपतियों के साथ नकारात्मक रवैया रहा। इससे उनमें निराशा का माहौल है और यही हालात रहे तो उन्हें यहां से पलायन करने पर विवश होना पड़ सकता है। उद्योगपतियों का कहना है कि केंद्र और प्रदेश सरकार एक ओर आयुर्वेद को बढ़ावा देने के दावे कर रही है, वहीं आयुर्वेद दवा उत्पादकों पर अनावश्यक कार्रवाई की जा रही है। वह भी ऐसे में कि आज तक कोई आयुर्वेद दवा का सैंपल फेल नहीं हुआ है।

उनका कहना है कि यदि उनके उद्योगों में अधिकारी कोई कमी पाते हैं तो उसे दूर करने का समय दिया जाना चाहिए न कि उनको उद्योग बंद करने की धमकी। उद्योगपति कहते हैं कि सरकार के कड़े रुख के चलते ही पिछले कुछ वर्षों में प्रदेश के करीब सवा सौ आयुर्वेद उद्योग बंद हो चुके हैं। इतने ही उद्योग शेष बचे हैं जिनमें से करीब 60 उद्योग बीबीएन में हैं। ऐसे में सरकार को इन उद्योगों को बढ़ावा देना चाहिए न कि उनके खिलाफ कड़ा रुख अपनाया जाना चाहिए।
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करना पड़ सकता है पलायन : बीएस चंदेल
एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष बीएस राणा व चेयरमैन जितेंद्र सिंह व सचिव ओपिंद्र कुमार, संदीप कुमार, आरसी सैणी, रविकिरण, बलराम, हरजीत, प्रवीण कुमार, अरिवंद्र, महेंद्र सिंह, यूएस सिंह, रामकरण उमेश कुमार व महादेव आदि ने कहा कि अगर मंदी के दौर में ऐसा वातावरण बना रहा तो वे अपने उद्योगों का दूसरे राज्यों में पलायन करने को मजबूर हो जाएंगे।

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