सोलन। शुष्क मौसम के चलते जिले में होने वाले हरी सब्जियों के करोड़ों रुपये के कारोबार पर संकट गहराने लगा है। हालांकि मौसम विभाग ने इस हफ्ते बारिश की संभावना जताई है लेकिन गेहूं की बिजाई समेत अन्य फसलों को लगाने में किसान लेट हो चुके हैं। इससे इन फसलों के उत्पादन पर असर पड़ने की संभावना है।
कृषि वैज्ञानिकों ने दो दिन में हल्की बौछारें पड़ने की संभावना जताई है। आसमान में बादल छाए रहेंगे और तापमान में करीब एक डिग्री सेल्सियस की कमी आएगी। इससे टमाटर की फसल बटोरने के बाद खाली खेत बारिश का इंतजार कर रहे किसानों को नई फसल बीजने में मदद मिल सकती है। इन दिनों सोलन में टमाटर की बंपर फसल देने वाले किसान बारिश की आस में दिन गुजारने को मजबूर हैं। कृषि विशेषज्ञों ने गेहूं बीजने के लिए 15 नवंबर तक सबसे बेहतर समय तय किया था। लेकिन अब तक एक भी बार बारिश नहीं हुई है। खेत खलिहान सूखे हैं। शुष्क मौसम का असर सब्जियों परा भी दिख रहा है। मेथी, मूली, शलगम की लोकल फसल बाजार तक नहीं पहुंच पा रही। टमाटर के खेत खाली होते ही लोग यहां हरी सब्जियां लगाने का काम शुरू करते हैं। लेकिन शुष्क मौसम घाटे का सौदा साबित हो रहा है। बहरहाल, अब मौसम के पूर्वानुमान के मुताबिक बारिश होती है तो किसानों को दूसरी फसल बीजने और खेत में सूख रही सब्जी की फसल को तैयार होने में मदद मिल सकती है।
दस प्रतिशत कम होगा गेहूं उत्पादन : उपनिदेशक
उपनिदेशक कृषि विभाग डॉ. आरएन ठाकुर ने कहा कि गेहूं बीजने में देरी हो रही है। 15 नवंबर तक गेहूं बीजना सर्वोत्तम रहता है। लेकिन बारिश न होने की वजह से बजाई नहीं हो पाई है। लगातार देरी की वजह से उत्पादन पर असर पड़ने की संभावना बनी हुई है। आगामी दो सप्ताह तक गेहूं बिजाई का कार्य पूरा न हुआ तो उत्पादन पर दस प्रतिशत असर दिखेगा। बारिश न होने की वजह से मेथी, मूली जैसी सब्जियां भी बाजार से दूर हैं।
15 से 17 तक होगी बारिश : वैज्ञानिक
डॉ. यशवंत सिंह परमार उद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी के मौसम विज्ञान विभाग, भू-विज्ञान मंत्रालय ग्रामीण कृषि मौसम सेवा पर्यावरण विज्ञान विभाग के वैज्ञानिक विभागाध्यक्ष डॉ. मोहन सिंह जॉगडा और डॉ. सतीश भारद्वाज ने कि अगले पांच दिन में मौसम के परिवर्तनशील रहने की संभावना है। 15 से 17 नवंबर को कहीं-कहीं हल्की बौछारें होने की संभावना है। दिन और रात के तापमान में 1 डिसै. कमी होने की संभावना है। हवा पूर्वी-उतर-पूर्वी दिशा से 7 से 10 किलोमीटर प्रति घंटा की गति से चलने तथा औसतन सापेक्षित आर्द्रता 35-91 प्रतिशत तक होने की संभावना है।
मटर की बीजाई से पूर्व उपचारित करें
वैज्ञानिकों के अनुसार मटर में विल्ट की रोकथाम के लिए बीज की बीजाई से पूर्व बेविस्टिन 0.5 ग्राम लीटर पानी में 2 घंटे उपचारित करने के बाद बीजाई करें। प्याज की तैयार पनीरी को खेत में 15 औक 10 सेंटीमीटर की दूरी पर रोपाई करें। लहसुन में निराई गुड़ाई तथा हल्की सिंचाई करें। पालक, मूली और शलगम आदि की बीजाई पूरी कर लें तथा खाद डालें।
सेब के लिए बनाए एक मीटर गड्ढा
सेब और अन्य शर्द कालीन फल पौधों के रोपण के लिए एक मीटर गड्ढा तैयार करके उसमें 30 किलोग्राम गली सड़ी गोबर खाद, 500 ग्राम सुपर फास्फेट 50 मिलीलीटर मासबन प्रति लीटर पानी प्रति गड्ढा डालें। पौधों के तौलियों में नमी को संरक्षित करने के लिए घास की मोटी तह के रूप में बिछाएं शीतोष्ण फलों की पौधशाला में समय-समय पर सिंचाई करें। गड्ढों की खुदाई का कार्य पूरा करने के बाद गड्ढों को भरना शुरू कर दें। गोबर की खाद, सुपरफास्फेट और कीटनाशक जैसे मैलाथियॉन धूडा को मिलाकर गड्ढों को भूमि से 15-20 सेंटीमीटर ऊपर तक भर दें। फल पौधों के तौलिए बनाने आरंभ कर दें।
नए पौधे लगाने से पूर्व खरपतवार निकालें
नए रोपित पौधों से खरपतवार निकालें और जंगली जानवरों से बचाएं। समय-समय पर पौधों का निरीक्षण करते रहें तथा सिंचाई करें। देवदार, सूजी, रई, तोष, खिड़क, हरड़, बहेड़ा, आंवला, अखरोट आदि के बीज इकट्ठा करके सुखाएं।