सोलन। कालका-शिमला नेशनल हाईवे पर सोमवार को बारिश के साथ दिन भर पहाड़ से पत्थर गिरते रहे। इस वजह से आवाजाही कर रहे वाहन क्षतिग्रस्त हुए हैं। इन हादसों में दो गाड़ियां बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई हैं। हाईवे पर चक्की मोड के समीप भारी भूस्खलन की वजह से दोपहर करीब ढाई बजे मार्ग पूरी तरह से बंद हो गया। आवाजाही ठप होने के चलते मार्ग पर दोनों तरफ वाहनों की लंबी कतारें लग गई।
इस दौरान जाम में फंसे लोगों को दोहरी मार का सामना करना पड़ा। लगातार बारिश की वजह से भूस्खलन भी हो रहा था। जाम में फंसे पर्यटक पहाड़ी से गिर रहे पत्थरों की वजह से बार-बार परेशान होते नजर आए। हालांकि इस बीच कंपनी की तरफ से मार्ग बहाल करने के लिए भारी मशीनरी लगाई थी। चक्की मोड़ में गिरे मलबे को मशीनरी पूरी तरह से साफ नहीं कर पाई। इसकी वजह से यहां करीब चार घंटे तक वाहन जाम में फंसे रहे। एहतियात के तौर पर शिमला की तरफ आने वाले वाहनों को टीटीआर के पास रोक दिया गया।
चंडीगढ़ जा रहे वाहनों के पहिये हाईवे पर सोलन से धर्मपुर तक थम गए। कई किलोमीटर लंबा जाम इस दौरान पूरे मार्ग पर लग गया। बारिश थमने के बाद करीब छह बजे यातायात बहाल हो पाया। लेकिन वाहनों की लंबी कतार की वजह से जाम से निजात नहीं मिल पाई। जाम में फंस दोनों तरफ के वाहन रेंगते हुए अपने गंतव्य की ओर बढ़ते रहे। हाईवे को फोरलेन में बदलने के लिए पहाड़ों की सीधी कटिंग की गई है। इस कटिंग को भूस्खलन से बचाने के लिए महज तीन मीटर के डंगे लगाए गए हैं। जो अब बरसात में नाकाफी साबित हो रहे हैं। फोरलेन निर्माता कंपनी एक तरफ के मार्ग को आज तक बहाल नहीं कर पाई है। जो वाहन क्षतिग्रस्त हुए हैं वो डबल लेन पर मार्ग के दूसरी तरफ चल रहे थे। अभी भी पहाड़ी पर कई भारी-भरकम चट्टानें फंसी हैं जो बड़े हादसे को अंजाम दे सकती हैं।
कंपनी प्रबंधन को दिए हैं निर्देश : एसडीएम
एसडीएम रोहित राठौर का कहना है कि बारिश की वजह से भूस्खलन हुआ है। जिसकी वजह से कालका-शिमला हाइवे जाम हो गया था। संबंधित एजेंसी को मार्ग बहाल करने के निर्देश तत्काल दे दिए गए थे। उन्होंने बताया कि हादसे में दो कारें क्षतिग्रस्त हुई हैं लेकिन कोई जानी नुकसान नहीं है। उन्होंने बताया कि हाईवे को जल्द से जल्द बहाल करने के निर्देश कंपनी प्रबंधन को दिए गए हैं।