कालका-शिमला फोरलेन निर्माण कार्य के दूसरे चरण की तैयारी, पेड़ों की निशानदेही न होने से कार्य शुरू होने में लगेगा वक्त
200 कब्जाधारकों को दिया जा चुका मुआवजा
910 दिन के रिकॉर्ड समय में पूरा होना है निर्माण
अमर उजाला ब्यूरो
सोलन।
कालका-शिमला नेशनल हाईवे को फोरलेन में बदलने के चल रहे निर्माण कार्य के दूसरे चरण में नौ हजार से अधिक पेड़ कटेंगे। इन पेड़ों की निशानदेही में देरी की वजह से कटान का कार्य अभी शुरू नहीं हो पा रहा है। अब बरसात आने से पूर्व तक काम शुरू होने की संभावना नहीं है। वन विभाग पेड़ चिहिन्त होने और इन्हें वन निगम को सौंपने में कम से कम 25 दिन और लगने की बात कह चुका है।
चंबाघाट से कैंथलीघाट तक वन विभाग की जमीन पर खड़े इन पेड़ों को काटने के बाद ही निर्माण कार्य शुरू हो पाएगा। एनएचएआई प्रबंधन पेड़ों के संबंध में सभी तरह के भुगतान वन विभाग को कर चुका है लेकिन निशानदेही न हो होने से कटान में देरी हो रही है। फोरलेन निर्माण के दूसरे चरण में चंबाघाट से कैंथलीघाट तक करीब 200 कब्जे चिन्हित किए हैं। नौ हजार 68 पेड़ फोरलेन की ज़द में आने की वजह से कटेंगे। निर्माण कार्य का जिम्मा हासिल करने वाली कंपनी को 910 दिन के रिकॉर्ड समय में काम पूरा करना है। लेकिन काम की शुरुआत उसी दिन से होगी जब एनएचएआई प्रबंधन फोरलेन को खाली कर इसे निर्माता कंपनी के हवाले करेगा। बहरहाल, बेहद धीमी गति से चल रहे पेड़ चिन्हित करने की वजह से काम जल्द शुरू होने की संभावनाएं बेहद कम नजर आ रही हैं।
जमा करवा दिया है मुआवजा : प्रबंधन
एनएचएआई के प्रोजेक्ट निदेशक एके स्वामी ने कहा कि पेड़ कटान के संबंध में मुआवजा वन विभाग को दिया जा चुका है। वन विभाग ने अभी तक पेड़ काटने की प्रक्रिया शुरू नहीं की है। पेड़ काटने और कब्जे हटाने के बाद खाली हुई जमीन निर्माणकर्ता कंपनी को प्रदान की जाएगी और उसके बाद ही निर्माण कार्य शुरू हो पाएगा। पेड़ कटान के संबंध में वन विभाग को ही निर्णय लेना है। एनएचएआई प्रबंधन ने नौ हजार 68 पेड़ों का मुआवजा जमा करवा दिया है।
प्रबंधन ने तय नहीं किया दायरा : विभाग
वनमंडल अधिकारी आरएस जसवाल ने कहा कि एनएचएआई प्रबंधन ने अभी तक फोरलेन का दायरा तय नहीं किया है। इसकी वजह से पेड़ चिह्नित करने में देरी हो रही है। एक बार दायरा तय हो जाए तो उसमें आने वाले पेड़ों को काटने की अनुमति वन निगम को मिल जाएगी। बताया कि वन विभाग को पेड़ चिह्नित करने की प्रक्रिया में करीब 25 दिन लग सकते हैं। कहा कि जितनी जल्दी दायरा तय हो पाएगा उतनी ही जल्दी काम शुरू होगा।
चंबाघाट में बाकी हैं अवशेष
फोरलेन के दूसरे चरण को लेकर शुरुआत में एनएचआई प्रबंधन और प्रशासन ने काफी मुस्तैदी दिखाई थी। शुरुआती दौर में चंबाघाट में भारी विरोध के बावजूद मोटर मार्केट को तोड़ा गया। कई अन्य कब्जे भी हटा दिए गए। लेकिन इन कब्जों के अवशेष अब भी मौजूद हैं। मार्ग को पूरी तरह से साफ नहीं किया है। आधे अधूरे टूटे हुए भवनों को छोड़ दिया है। कुछ भवन तो ऐसे भी हैं जिन्हें मकान मालिकों ने खुद तोड़ा था उसके बाद इन पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। मलबा हटाकर मार्ग खाली करना एनएचएआई प्रबंधन की जिम्मेदारी है।