अर्की (सोलन)। किडनी की बीमारी से जूझ रही दाड़लाघाट की दीपिका (16) की मौत पर अपने ही नहीं पराये भी रो पड़े। दीपिका के स्कूल का माहौल भी शनिवार को गमगीन था। स्कूल स्टाफ और बच्चे दीपिका के स्वस्थ होने के लिए दुआएं मांग रहे थे लेकिन उनकी फरियाद अनसुनी रह गई। फगवाना गांव में भी मातम पसरा हुआ है। मरघट से खामोशी को बीच-बीच में परिजनों की दर्दनाक चीखें तोड़ रही थीं। वहीं दीपिका की मौत का पता चलते ही स्कूल में भी माहौल गमगीन हो गया। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल दाड़ला में दसवीं कक्षा में पढ़ने वाली दीपिका के अध्यापक भी मौत का पता चलते रो पड़े। दीपिका की क्लास टीचर मंजू ने बताया कि वह सब से ही अलग बच्ची थी। ज्यादा बात नहीं करती थी और अपने काम से काम रखती थी। उसके मुंह में कई दिनों से सूजन थी जिस कारण उसे छुट्टी पर घर भेज दिया जाता था।
अध्यापिका ने कहा कि वह प्रेक्टिकल साइंस का एग्जाम दे चुकी थी और परीक्षा की तैयारी कर रही थी। बच्ची के इलाज के लिए सभी अध्यापकों ने करीब 32 हजार से ज्यादा की राशि उसके इलाज के लिए एकत्रित की थी। स्कूल में पढ़ने वाले विद्यार्थी भी अब उसकी मदद के लिए जुट गए थे। प्रदेश सहित भारी राज्यों के लोगों ने भी उसकी मदद के लिए हाथ बढ़ा दिए थे और परिवार वालों को भी अब ठीक होने की उम्मीद जगाई थी। लेकिन वक्त को कुछ और मंजूर था सारी कोशिश नाकाम रही। दीपिका इस दुनिया से अलविदा कह कर चली गई। जानकारी के मुताबिक मुख्यमंत्री ने भी बेटी के इलाज के लिए निर्देश दिए थे। दाड़लाघाट के नजदीक कशलोग पंचायत के फगवाना गांव की अमरा देवी की बेटी दीपिका की दोनों किडनियां कई वर्षों से खराब चल रही थीं। इसका उपचार आईजीएमसी शिमला में चल रहा था। इस बीच कई बार वह पीजीआई चंडीगढ़ में इलाज के लिए जाती रहीं। चार वर्ष पूर्व दीपिका के पिता का उसके सिर से साया उठ गया था। इस कारण घर को चलाना बहुत मुश्किल हो गया। इलाज के लिए पैसे नहीं थे, इस कारण इलाज में देरी हो रही थी। अखबारों के माध्यम से जब दीपिका की गरीबी और बीमारी का मामला उजागर हुआ तो दानी सज्जनों ने लाखों रुपये उसके खाते में डाले दिए लेकिन सांसें साथ छोड़ गईं।