अमर उजाला ब्यूरो
सोलन। देश के विभिन्न क्षेत्रों में पौधों के रोगों को सीमित रखने के लिए भारत को एक घरेलू संगरोध प्रणाली स्थापित करने की आवश्यकता है। यह बात डॉ. यशवंत सिंह परमार उद्यानिकी और वानिकी विश्वविद्यालय नौणी में संयंत्र रोग प्रबंधन में जैव-तर्कसंगत दृष्टिकोण विषय पर आधारित राष्ट्रीय संगोष्ठी के दौरान विशेषज्ञों ने कही। इसके अलावा फसल लगने और फसल काटने के दौरान होने वाली हानि को कम करने के लिए भी कई सुझाव दिए गए। इस अवसर पर भारतीय प्लांट पैथोलॉजिस्ट सोसाइटी ने चार जिलों के किसानों को उनके कार्यों के लिए सम्मानित किया। इसमें बेस्ट थेसिस का 11000 रुपये का पुरस्कार नौणी विवि की पूर्व छात्रा डॉ. अदिति शर्मा को मिला। बेस्ट पोस्टर की प्रतियोगिता में 160 लोगों ने भाग लिया। इसमें अर्जुन चौहान ने पहला स्थान हासिल किया। संगोष्ठी का आयोजन विवि के प्लांट पैथोलॉजी विभाग की ओर से भारतीय प्लांट पैथोलॉजिस्ट सोसाइटी और हिमालयन फाइटोपैथोलॉजिकल सोसाइटी की ओर से किया गया। इस मौके पर भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के उपमहानिदेशक (बागवानी) डॉ. एके सिंह मुख्य अतिथि रहे। आईसीए आरके एडीजी (प्लांट प्रोटेक्शन) डॉ. पीके चक्रवर्ती ने रोगजनकों के प्रसार को कम करने के लिए खेतों में जैव सुरक्षा की आवश्यकता पर जोर दिया।