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रामलोक मंदिर पर फैसले से रूड़ा में तनाव, ग्रामीणों ने छेड़ी कब्जा छुड़ाने की मुहिम

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अमर उजाला ब्यूरो

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सोलन। बहुचर्चित रामलोक मंदिर को सरकार के हवाले करने का फैसला सार्वजनिक होते ही रूड़ा में तनाव बढ़ गया है। ग्रामीण दोबारा एकजुट हो गए हैं और मंदिर के मुख्य पुजारी बावा अमरदास से कब्जा छुड़ाने की मुहिम फिर शुरू हो गई है। ग्रामीण किसी भी कीमत पर इस भव्य मंदिर को सरकार के अधीन करवाना चाहते हैं। इसके लिए तय रणनीति के तहत आगामी एक सप्ताह तक दोबारा प्रदर्शनों का दौर शुरू होगा।

इसमें कंडाघाट से सोलन उपायुुक्त कार्यालय तक 22 पंचायतों से अधिक पंचायतों के लोग प्रदर्शन कर सकते हैं। इसकी तैयारी को लेकर ग्रामीणों की कोर कमेटी की एक अहम बैठक बुधवार को हिमाचल किसान सभा के बैनर तले भी आयोजित की गई। इसमें मंदिर पर फैसला आने के बाद आगे की रणनीति बनाई गई। रूड़ा में रामलोक मंदिर पर तहसीलदार कंडाघाट ने एक अहम फैसले में मंदिर को सरकार के अधीन करने की बात कही है।
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साथ ही मंदिर का निर्माण राजस्व विभाग की जमीन पर बना बताया गया है। इस समय मंदिर पर इसके निर्माणकर्ता बाबा अमरदास मुख्य पुजारी के रूप में तैनात हैं। इन्हें इस निर्माण के एवज में एक लाख छह हजार रुपये जुर्माना भी लगाया गया है। इस फैसले के खिलाफ बाबा के पास अपील में जा सकते हैं लेकिन ग्रामीण उन्हें अपील में जाने से पहले ही मंदिर से बेदखल कर देने की तैयारी में हैं। इसके लिए प्रयास शुरू कर दिए गए हैं।

जल्द अमल में लाया जाए फैसला : ग्रामीण
हिमाचल किसान सभा के सचिव प्यारे लाल ने बताया कि रामलोक मंदिर को लेकर चल रहे विवाद पर कंडाघाट तहसीलदार के फैसले का ग्रामीण स्वागत करते हैं। ग्रामीण लंबे समय से संघर्ष कर रहे थे और यह उनके संघर्ष की जीत है। सरकारी जमीन पर मंदिर निर्माण के खिलाफ 22 पंचायतों के लोग एकजुट हैं जो जिला प्रशासन से बाबा अमरदास को बेदखल कर मंदिर को सरकार के हवाले करने की बात रखेंगे। उन्होंने कहा कि इस फैसले को जल्द लागू किया जाए इस पर जोर दिया जाएगा।
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रामलोक मंदिर निर्माण और विवाद
रूड़ा में रामलोक मंदिर निर्माण और विवाद का गहरा नाता रहा है। बाबा ने रामलोक मंदिर में भव्य मूर्तियों की स्थापना की लेकिन बाबा और ग्रामीणों के बीच मंदिर निर्माण से लेकर अब तक लगातार विवाद चल रहा है। बाबा और ग्रामीणों के बीच हिंसक झड़प भी हो चुकी है जिसकी वजह से बाबा को मंदिर से जबरन बेदखल कर दिया गया था। हालांकि, उपचार के बाद बाबा वापस मंदिर लौट आए और उन्होंने निर्माण कार्य पूरा करवा दिया। अब निर्माण पूरा होने के बाद तहसीलदार की तरफ से आए फैसले से रूड़ा में दोबारा तनाव बढ़ गया है। ग्रामीण मंदिर में गुंडा तत्वों की मौजूदगी का भी लगातार आरोप लगाते रहे हैं।

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