सोलन। केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के राष्ट्रीय आह्वान पर हजारों औद्योगिक और अन्य मजदूर वर्ग केंद्र सरकार की मजदूर एवं किसान विरोधी नीतियों को लेकर सड़क पर उतर आए हैं। राज्य सचिव अतुल चंद्र भारद्वाज ने बताया कि दक्षिण पंथी केंद्रीय सरकार ने पूरी अर्थव्यवस्था को कॉरपोरेट और पूंजीपतियों को छोड़कर संकट में डाल दिया है। इसके विरोध को लेकर एटक के प्रदेशाध्यक्ष कॉमरेड जगदीश चंद्र भारद्वाज के नेतृत्व में सरकार विरोधी विशाल रैली का आयोजन किया गया। उन्होंने सभी मजदूरों से आह्वान किया कि साम्राज्यवाद कॉरपोरेट परस्त फासिस्ट सरकार के आने से मजदूर वर्ग को पूंजीपतियों, उद्योगपतियों का गुलाम बना दिया है। सरकार को बने साढ़े चार साल का समय बीत जाने के बाद भी आज तक कोई वायदा पूरा नहीं किया गया है। अब मजदूरों, किसानों को अच्छे दिनों की बजाय बुरे दिन शुरू हो चुके हैं।
उन्होंने कहा कि किसानों की जमीनों को हड़पने का कानून लाया गया। मजदूरों ने अंग्रेजों से लड़कर और पिछली सरकारों से संघर्ष बलिदान देकर जो श्रम कानून बनवाए, उन्हें मोदी सरकार ने पूंजीपतियों, बड़े उद्योगपतियों और कॉरपोरेट घरानों के पक्ष में बनाने की कोशिश की गई। साथ ही फिक्स टर्म, निर्धारित अवधि में रोजगार, आउटसोर्स और ठेके जैसे काले कानून मजदूरों पर लाद दिए। उन्होंने कहा कि ट्रेड यूनियनों और मजदूर वर्ग को श्रम कानूनों में कॉरपोरेट पक्ष के संशोधन स्वीकार नहीं है। भारद्वाज ने कहा कि कोई भी सरकार मजदूरों और कर्मचारियों से लड़कर देश का विकास नहीं कर सकती। उन्होंने सरकार से न्यूनतम वेतन 18 हजार मासिक करने, महंगाई को रोकने, ठेका प्रथा, आउटसोर्स खत्म करने, स्थायी कामों में स्थायी रोजगार देने और समान काम के लिए समान वेतन देने की मांग उठाई।
सरकार को दी चेतावनी
प्रदेशाध्यक्ष कामरेड जगदीश जगदीश चंद्र भारद्वाज ने केंद्रीय सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि मजदूरों और ट्रेड यूनियनों से टकराकर कोई भी सरकार नहीं बन सकती है। उन्होंने कहा कि 8, 9 जनवरी की दो दिवसीय हड़ताल से सरकार की नीतियों का पर्दाफाश हो गया है।