सोलन। कसौली और सोलन शहर में अवैध निर्माण की कड़ी में अब उद्योग जगत का भी जुड़ गया है। औद्योगिक विकास के नाम पर बनाई जा रही बड़ी-बड़ी इमारतों में खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। हाईप्रोफाइल केस होने की वजह से ज्यादातर विभागीय कार्रवाई में देरी हो रही है। सोलन शहर के सबसे नजदीकी औद्योगिक क्षेत्र चंबाघाट में नियमों की अनदेखी कर ऐसी बहुमंजिला इमारतों का निर्माण किया गया है।
हैरानी की बात यह है कि उद्योगों के नक्शे पास करने के लिए उद्योग विभाग व निगम के दोहरे मापदंड पूरे करने जरूरी हैं लेकिन इन दोनों को दरकिनार कर उद्योगपतियों ने न सिर्फ निर्माण किया बल्कि अवैध निर्माण को नियमित करने के लिए आवेदन भी जिला उद्योग विभाग प्रबंधन के पास कर दिए हैं। इनमें ऐसे मामले भी हैं जिनमें तीन या साढ़े तीन मंजिल की अनुमति हासिल कर बहुमंजिला भवनों का निर्माण किया गया है। मामला उजागर होने के बाद राज्य उद्योग विकास निगम ने पूरे मामले की जांच की बात कही है। साथ ही यह भी एलान किया है कि जिन औद्योगिक घरानों का निर्माण नक्शे से बाहर पाया जाएगा, उनकी स्वीकृति को रद्द भी किया जा सकता है।
कसौली में हुए अवैध निर्माण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने 13 होटलों को गिराने के आदेश दिए हैं। इस निर्माण के लिए जिम्मेदार करीब एक दर्जन अधिकारियों पर कार्रवाई की गाज गिरने वाली है। सोलन शहर में अवैध निर्माण को लेकर उच्च न्यायालय में मामला लंबित है। यहां करीब 150 मामलों की जांच चल रही है। ये सभी मामले जीआईएस सर्वे से उजागर हुए हैं। अब सोलन शहर में औद्योगिक घरानों की जांच खुलती है तो जिले में यह अवैध निर्माण और उस पर जांच का तीसरा बड़ा मामला होगा।
रद्द हो सकता है उद्योग का पंजीकरण : जरियाल
राज्य उद्योग विकास निगम के अधिशासी अभियंता महिंद्र जरियाल का कहना है कि उद्योगों के नक्शे निर्माण से पूर्व स्वीकृत किए जाते हैं। ये नक्शे स्वीकृति के लिए उनके पास जरूरत आते हैं लेकिन इनकी जांच का जिम्मा डीआईसी का रहता है। उन्होंने बताया कि यदि कोई भी उद्योग नक्शे से बाहर जाकर निर्माण करता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि साबित होने पर उद्योग का पंजीकरण भी रद्द हो सकता है। उन्होंने बताया कि सोलन में सामने आए मामलों की निगम पूरी जांच करेगा।
दोतरफा कार्रवाई का प्रावधान
उद्योगों में अवैध निर्माण के मामलों में जांच की शुरूआत जिला उद्योग विभाग स्तर पर होती है। इसके बाद इसकी रिपोर्ट निगम को की जाती है। निगम अपने स्तर पर जांच करता है और यदि निर्माण में कोताही साबित होती है तो दोतरफा कार्रवाई शुरू हो जाती है। इसमें एक मामला टीसीपी को चला जाता है जबकि दूसरे मामले में निगम कार्रवाई करता है। इसमें उद्योग के बिजली और पानी के कनेक्शन काटने से पंजीकरण रद्द करने तक की कार्रवाई शामिल रहती है।