सोलन। रंगों के त्यौहार होली के बाजार पर चीनी सामान का कब्जा हो गया है। दीवाली की तर्ज पर ही बड़ी संख्या में चीन में बना प्लास्टिक का सामान दुकानों तक पहुंचा है। चीनी सामान के आकर्षण की वजह से देसी सामान की बिक्री कम हो गई है। चीन से निर्मित होकर बाजार तक पहुंचे सामान पर कोई भी निर्धारित मूल्य अंकित नहीं है। इसकी वजह से दुकानदार मनमर्जी से इसे बेच रहे हैं। होली को लेकर सोलन शहर की दुकानें सज गई हैं। लेकिन इन दुकानों में देसी सामान की कमी खल रही है। रंगों से लेकर पिचकारी तक चीन से निर्मित होकर बाजार में पहुंचा है। प्राकृतिक तौर पर बने रंग महंगे होने की वजह से मांग में नहीं आ रहे हैं। होली को लेकर बाजार में रंगों की कीमत 20 रुपये से शुरू है। चाइना मेड पिचकारी 20 से दो हजार रुपये तक उपलब्ध है। इस बारे कई अलग अलग प्रकार की पिचकारियां जैसे ड्राय कालर पिचकारी, गुलाल गन पिचकारी, वाटर गन और टेडी बीयर पिचकारियां आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं।
दुकानदार जगमोहन, कमल, योगेश, राकेश, रींकू, मुकुल, ओमप्रकाश और सुनील शर्मा ने कहा कि इस बार होली का त्योहार काफी बरकत लेकर आया है। इस बार होली के रंगों में भी अलग-अलग किस्म के रंग जैसे हर्बल, नेचुरल, रेम्बों कलर और साथ ही पतंजली के रंग भी बाजारों में उपलब्ध हैं। दुकानदारों ने अपनी दुकानों का आकर्षण बढ़ाने के लिए नया तरीका सोचा है जिसमें विभिन्न रंग के विग लगाकर लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं। मापतोल विभाग के निरीक्षण अधिकारी ओमप्रकाश ने कहा कि स्टाफ कम होने से वह मुआयना नहीं कर पा रहे हैं। इस कारण सामान के सही दाम की चेकिंग नहीं हो रही है। इस बारे में किसी ने शिकायत नहीं दी है। विभाग होली में उपलब्ध बिना एमआरपी के सामान की जांच करेगा और इस संबंध में आवश्यक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
त्वचा को केमिकल से बचाएं : डॉ. रजनी
क्षेत्रीय अस्पताल सोलन की चर्म रोग चिकित्सक डॉ. रजनी ने कहा कि रंगों में केमिकल होने से इसका स्किन पर असर पड़ सकता है। होली खेलते समय कुछ सावधानियां बरतकर चर्म रोगों के असर को दूर किया जा सकता है। केमिकल से बचने के लिए तैलीय पदार्थ का इस्तेमाल किया जा सकता है। लोगों को सलाह दी है कि केमिकल रंगों की जगह प्राकृतिक सूखे रंग का इस्तेमाल करें।