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मुख्यमंत्री के हलके में नब्ज टटोलने को डॉक्टर नहीं

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arki - फोटो : arki
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आरके शर्मा
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दाड़लाघाट (सोलन)।
मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की रणभूमि अर्की में स्वास्थ्य सेवाओं की हालत दुरुस्त नहीं है। लोगों के स्वास्थ्य की नब्ज टटोलने वाले यहां न तो डॉक्टर हैं और न ही पर्याप्त स्टाफ। मरीजों को शिमला, सोलन और चंडीगढ़ उपचार करवाना पड़ रहा है। छोटे स्वास्थ्य केंद्रों में चार बजे के बाद कोई डॉक्टर नहीं मिलता है। विधानसभा क्षेत्र के अधीन सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर और अन्य स्टाफ की भारी कमी है।

अर्की अस्पताल का दर्जा एफआरयू से बढ़ाकर सिविल तो कर दिया लेकिन डॉक्टरों के आधे से ज्यादा पद खाली हैं। यहां डॉक्टरों के 14 स्वीकृत पदों में से सिर्फ आठ ही सेवाएं दे रहे हैं। शिशु रोग विशेषज्ञ, अस्थि रोग विशेषज्ञ और अन्य पद खाली हैं। करोड़ों खर्च कर अल्ट्रासाउंड मशीन स्थापित की लेकिन रेडियोलॉजिस्ट का पद खाली है। क्षेत्र के लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं के लिए 45 से 54 किलोमीटर दूर शिमला, सोलन या चंडीगढ़ का चक्कर लगाना पड़ रहा है। जिसमें समय और पैसे दोनों की बर्बादी होती है। निजी अस्पतालों चांदी कूट रहे हैं।
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सिविल अस्पताल कुनिहार में डॉक्टरों के 6 पद स्वीकृत हैं लेकिन यहां पर भी एक ही डॉक्टर के कंधों पर क्षेत्र के लोगों के स्वास्थ्य की जिम्मेवारी है। ईएसई दाड़लाघाट में दो डॉक्टर सेवाएं दे रहे हैं। शाम चार बजे के बाद अस्पताल में ताला लगा दिया जाता है। जबकि सीमेंट उद्योग और राष्ट्रीय राजमार्ग के नजदीक होने की वजह से रात में भी डॉक्टर की आवश्यकता रहती है। ये अस्पताल सिर्फ रेफरल सेंटर ही बन कर रह गया है। पीएचसी धुंधन में एक डॉक्टर तो है लेकिन लैब तकनीकी सहायक के अलावा कई पद रिक्त हैं। दूरदराज क्षेत्र बागा में सब सेंटर का दर्जा बढ़ाकर पीएचसी किया गया है। लेकिन डॉक्टर और अन्य स्टाफ की तैनाती अब तक नहीं हो पाई है। दूसरी जगह से डेपुटेशन पर हफ्ते में एक दिन डॉक्टर भेजा जाता है। स्वास्थ्य खंड के तहत आने वाले 36 सब सेंटरों में एक-एक महिला और पुरुष स्वास्थ्य कार्यकर्ता का पद स्वीकृत हैं लेकिन 11 पुरुष जबकि 35 महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता सेवारत हैं।

अर्की में नहीं होते हैं अल्ट्रासाउंड
अर्की में अल्ट्रासाउंड की सुविधा नहीं मिल पा रही है। इसका सबसे ज्यादा नुकसान गर्भवती महिलाओं को उठाना पड़ रहा है। सरकार ने गर्भवती के लिए मुफ्त में अल्ट्रासाउंड का प्रबंध किया है। लेकिन सरकार अस्पताल में यह सुविधा न होने की वजह से उन्हें शिमला या सोलन जाना पड़ता है। वहां भी उनके केस लंबित कर दिए जाते हैं। ऐसे में उनके पास निजी लैब में अल्ट्रासाउंड करवाने के अलावा कोई चारा नहीं रहता है।

जेनरिक दवाओं का स्टोर भी बंद
अर्की अस्पताल में जेनरिक दवाओं के स्टोर में लंबे समय से ताला लटका है। लोगों को सस्ती दवाएं उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं। केंद्र सरकार की इस योजना के तहत अर्की में जेनरिक दवाओं का स्टोर खोला गया था। लेकिन दवाओं की बिक्री शुरू नहीं हो पाई और स्टोर कुछ समय के बाद ही बंद हो गया।
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जल्द दूर करेंगे खामियां : बीएमओ
बीएमओ तारा चंद नेगी का कहना है कि विभाग लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने के हर संभव प्रयास कर रहा है। खाली पदों को भरने के संदर्भ में आला अधिकारियों से पत्राचार जारी है। उम्मीद है जल्द ही खामियां दूर की जाएंगी।
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