कुनिहार (सोलन)। जनवरी में बारिश न होने से जहां फसलें सूखे की चपेट में आकर मुरझाने लगी हैं वहीं दूसरी ओर जंगली जानवर भी रही सही फसल को चट कर रहे हैं। कुनिहार क्षेत्र में कृषि ही अधिकांश लोगों का परिवार के पालन-पोषण का जरिया है। क्षेत्र में कोई भी सिंचाई योजना न होने के कारण किसानों को प्रकृति पर ही आश्रित रहना पड़ता है। इस बार तो किसानों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। एक और बारिश न होने से फसल वैसे ही मुरझाने लगी है तो रही सही कसर लावारिस पशुओं सहित जंगली जानवर पूरी कर रहे हैं। हजारों रुपये का बीज खेतों में डाल कर किसानों के चेहरों पर चिंता की लकीरें देखी जा सकती हैं।
पुलाहड़ा, बाग, नमोल, कोठी, ऊंचागांव, बानी, बीरन सहित आस पास के गांव में लावारिस पशुओं सहित जंगली जानवर सूखे से बची खुची फसल को चट कर रहे हैं। हेम चंद ठाकुर, जगदीश गर्ग, प्रदीप ठाकुर, प्रेम राज, राजेंद्र शर्मा, भगवान दास, भगत राम पीयूष व अन्य ने बताया कि जनवरी में भी बारिश न होने के कारण फसल पर सूखे व कोहरे की मार तो पड़ ही रही है। रात्रि में खेतों में खरगोश, सुअर, लंगूर, बंदर, बारहसिंगा, काकड़, मोर सहित लावारिस पशु फसलों को चट कर तबाह कर रहे हैं।
किसानों का कहना है कि नुकसान पर सरकार और प्रशासन को जल्द ही कदम उठाना चाहिए। जंगली जानवरों से किसानों की फसलों को हो रहे नुकसान के बारे में जब वनमंडल अधिकारी कुनिहार सतीश नेगी से बातचीत की गई तो उन्होंने बताया कि जंगली जानवरों के कारण किसानों को होने वाले नुकसान के लिए सरकार की ओर से कोई भी पॉलिसी नहीं बनी है। किसानों को जंगली जानवरों से स्वयं ही अपनी फसल की रखवाली करनी होगी।