कुनिहार (सोलन)।
सब्जी की खेती से पालन पोषण करने वाले किसान परिवार ने गर्म जलवायु में भी सेब उगाने में सफलता हासिल की है। खेतीबाड़ी से जुड़े इस परिवार में बाप और बेटे ने गंबर खड्ड के साथ तपती रेतली जमीन में सेब उगाने का प्रयोग किया, जो सफल रहा है। कुनिहार के साथ लगती जाड़ली पंचायत के किसान नेक राम और चमन लाल ने सूखी जमीन पर सेब उगा लिया है।
आजीविका कमाने के लिए वे टमाटर, खीरा, भिंडी, शिमला मिर्च, गोभी सहित नकदी फसलें उगाते हैं। जाड़ली के इन दोनों किसानों ने बंजर जमीन पर करीब 3 वर्ष पहले सेब के 20 पौधे ट्रायल के तौर पर लगाए थे। पौधों की सही तरीके से देख-रेख के बाद आज दोनों की मेहनत रंग लाई है।
हर एक पौधे पर पहले फूलों की भरमार रही और फिर कामयाब फ्रूट सेटिंग से सेब आकार लेने लगे। वर्तमान में सेब के पेड़ से की बंपर पैदावार देते दिखाई दे रहे हैं। गर्म इलाके में सेब की पैदावार का प्रयोग सफल होने पर अब उन्होंने सेब का बगीचा लगाने का इरादा कर लिया है। कुनिहार, पट्टाबरौरी, नगर श्यावां, बणी, दुगड़ी, जाडली सहित कई गांवों के बागवान अब सेब के बागान लगा कर आर्थिकी को मजबूत बनाना चाहते हैं। स्थानीय ग्रामीणों राजेश ठाकुर, सुभाष शर्मा, सादी राम, रमेश शर्मा ने कहा कि इन दोनों की सफलता को देखते हुए बेरोजगार युवाओं में भी बागवानी के प्रति रुझान बढ़ेगा। इस प्रयोग की सफलता से निचले हिमाचल में भी सेब की बागवानी हो सकेगी।
लो चिलिंग वैरायटी की बढ़ रही मांग: विभाग
उद्यान प्रसार अधिकारी पवन शर्मा ने बताया कि इस क्षेत्र में लो चिलिंग वैरायटी, अन्ना प्रजाति, गोल्डन डोर सेटा और गोल्डन रॉयल आदि की किस्में कामयाब हो रही हैं। बागवान हरिमन शर्मा घुमारवीं जिला बिलासपुर की नर्सरी से सेब के पौधे ला कर लगा रहे हैं।
नौणी विवि भी कर रहा प्रयोग
नौणी विवि ने भी गर्म इलाके में लगने वाले सेब की अन्ना प्रजाति पर कई प्रयोग किए हैं। इस बार पौधों की बिक्री के दौरान अन्ना प्रजाति भी शामिल किया गया है। इसकी हरियाणा, पंजाब और गुजरात से भी मांग आई है। हिमाचल में वो इलाके जहां बर्फ नहीं गिरती वहां वैज्ञानिक अन्ना प्रजाति के पौधे लगाने की सलाह दे रहे हैं।