अमर उजाला ब्यूरो
सोलन। 33 वर्षों तक शिक्षा विभाग में सेवाएं देने के बाद एससीईआरटी सोलन से डॉ. अशोक गौतम सेवानिवृत्त हो गए। इस अवसर पर एससीईआरटी सोलन के स्टाफ ने उन्हें विदाई दी। अशोक गौतम एससीईआरटी सोलन में साढ़े पांच साल तक रहे। सोलन की अर्की तहसील के म्याणा गांव में जन्मे अशोक गौतम ने पांच साल तक एससीईआरटी में रहते हुए एससीईआरटी को नए आयाम देने की कोशिश की।
परिषद में पाठ्य चर्या प्रकोष्ठ के समन्वयक रहते हुए उन्होंने सरकारी स्कूलों और स्कूल शिक्षा बोर्ड से संबद्ध स्कूलों की कक्षा तीन से लेकर पांच तक की कक्षाओं के बच्चों के लिए हिंदी, अंग्रेजी, गणित एवं पर्यावरण अध्ययन की पाठ्यपुस्तकें तैयार की। ये पुस्तकें एनसीएफ 2005 के शैक्षिक उद्देश्यों को पूरा करने वाली हैं। एनसीईआरटी 15 साल तक अपने पाठ्यक्रम को संशोधित नहीं करती, इन पुस्तकों को हर बार नया रूप देने का प्रयास भी हुआ।
प्री-प्राइमरी कक्षाएं शुरू करवाने में भी रहा योगदान
डॉ. गौतम ने कक्षा एक से बारहवीं तक के छात्रों के लिए योग, संगीत और शतरंज का पाठ्यक्रम तैयार करने में योगदान दिया। इसे सरकार ने स्वीकृत किया और लागू करने की तैयारी है। इन्होंने सरकारी स्कूलों में कम होती छात्रों की संख्या को लेकर प्रो. वीणा ठाकुर, प्रो. मनोज कुमार के साथ मिल अध्ययन किया और स्कूलों में छात्रों की गिरती संख्या पर रोक लगाई जा सकती है।
सड़क सुरक्षा पर तैयार किया है पाठ
सड़क सुरक्षा पर आधारित पाठ भी इनकी अगुआई में परिषद ने तैयार किया जिसे एनसीईआरटी दिल्ली से अनुमति मिलने के बाद सरकारी स्कूलों के बच्चों की पाठ्यपुस्तकों में बच्चे पढ़ रहे हैं। अशोक गौतम कहते हैं कि उन्हें तब बहुत अच्छा लगा जब परिषद को बच्चों के स्कूली बस्ते में देखा। 24 व्यंग्य संग्रह लिख चुके हैं। उधर, अशोक गौतम ने बताया कि वह अब अपना अधिकतर समय सामाजिक कार्यों और लेखन पर केंद्रित करेंगे।