सोलन। गर्भवती महिलाओं के लिए सरकार ने कई योजनाएं चला रखी हैं लेकिन अस्पताल में उन्हें उपचार करवाने के लिए घंटों लाइनों में खड़े होकर धक्के खाने पड़ते हैं। यही नहीं ओपीडी के बाहर उनके बैठने तक के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। महिलाएं फर्श पर बैठकर अपनी बारी का इंतजार करने को मजबूर हैं। चिकित्सकों की कमी से जूझ रहे क्षेत्रीय अस्पताल सोलन के भी यही हाल हैं। मंगलवार को अस्पताल की गायनी ओपीडी के बाहर एक महिला यहां गश खाकर गिर गई। महिला यहां चेकअप करवाने आई थी। महिला पेट के बल नहीं गिरी नहीं तो कोई बड़ा हादसा हो सकता था। अस्पताल की चाइल्ड ओपीडी पहले से ही बंद पड़ी है।
मंगलवार को ओपीडी के बाहर अधिक भीड़ और बैठने के लिए जगह न होने से महिला अचानक से बेहोश हो गई। आलम यह था कि भीड़ के चलते हवा भी अंदर तक नहीं पहुंच पा रही थी। अस्पताल में इलाज के लिए आईं कुछ महिलाएं फर्श पर बैठी थीं। कुछ औरतें लंबी-लंबी कतारों में अपनी बारी का इंतजार करती रहीं। हैरानी की बात यह है कि इस ओपीडी में सबसे ज्यादा भीड़ रहती लेकिन इसके बावजूद अस्पताल प्रशासन इसे खुली जगह शिफ्ट नहीं कर रहा। महिलाओं के लिए बैठने तक के प्रबंध नहीं हैं। मरीजों को फर्श पर बैठकर अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है। गायनी ओपीडी के बाहर पंद्रह-बीस महिलाओं के बैठने का इंतजाम है जबकि यहां एक हजार से अधिक की ओपीडी रहती है। सोलन, सिरमौर के अलावा यहां शिमला जिले की महिलाएं भी चेकअप करवाने आती हैं।
अस्पताल में सबसे ज्यादा भीड़ गायनी ओपीडी में ही रहती है। यहां पर जगह कम होने के कारण लोगों को खड़े होने में दिक्कतें होती हैं। ओपीडी के बाहर महिलाओं के लिए बैठने के उचित प्रबंध नहीं हैं। चेकअप करवाने के लिए आने वाली महिलाओं को फर्श पर बैठकर ही इंतजार करना पड़ता है। यही नहीं चिकित्सकों की कमी के चलते घंटों लाइनों में भी खड़े होना पड़ता है। मंगलवार को भीड़ में खड़ी होकर अपनी बारी का इंतजार कर रही महिला अचानक बेहोश होकर फर्श पर गिर गई। इसके बाद बेहोश महिला को ओपीडी में ले जाया गया जहां डॉक्टर ने महिला को उपचार दिया।
नहीं किया जा रहा ओपीडी को शिफ्ट
क्षेत्रीय अस्पताल में प्रतिदिन 1200 से अधिक ओपीडी रहती है। इनमें से सबसे अधिक ओपीडी गायनी की होती है। गायनी ओपीडी में जगह कम होने के चलते महिलाओं को अपना इलाज करवाने में भारी परेशानी झेलनी पड़ती है। लेकिन विभाग द्वारा इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा। यदि इस जगह से ओपीडी को कहीं खुली जगह शिफ्ट किया जाता है तो मरीजों को काफी राहत मिलेगी।
अचानक आया चक्कर : विशेषज्ञ
स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. ललित महाजन ने बताया कि सुबह ओपीडी के बाहर एक महिला चेकअप करवाने के इंतजार में लाईन में खड़ी थी। अचानक महिला को चक्कर आ गया। इसके बाद उसे उपचार दिया गया है महिला की तबीयत अब ठीक है।
नया भवन बनने से हल होगी समस्या : डॉ. उप्पल
वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजन उप्पल ने कहा कि दस करोड़ रुपये मातृ एवं शिशु केंद्र बन रहा है। इस भवन के बनते ही गायनी ओपीडी शिफ्ट कर दी जाएगी। वर्तमान में गायनी ओपीडी के बाहर अतिरिक्त बैंच लगाने के लिए जगह नहीं है। इस वजह से दिक्कत आ रही है। नया भवन बनते ही यह समस्या हल हो जाएगी।