नालागढ़ (सोलन)। 1421 में बसे हंडूर रियासत के नालागढ़ शहर में पेयजल संकट गाहे बगाहे गहराता ही रहा है। चिकनी नदी किनारे बनी उठाऊ पेयजल योजना से ही काम चलाया जा रहा है। जहां तीन ट्यूबवेलों के माध्यम से पेयजल लिफ्ट होता है। इनमें से एक ट्यूबवेल सिंचाई देने के लिए है, लेकिन पेजयल सप्लाई देने के लिए प्रयोग किया जा रहा है।
पिछले करीब डेढ़ दशक से जलापूर्ति की समस्या हर बार गर्मी में गहरा जाती है। इन दो ट्यूबवेलों की पानी की क्षमता भी आधी हो गई है। नई योजना को लेकर नगर परिषद और आईपीएच महकमे में ठनी हुई है, क्योंकि शहर में पेयजल वितरण का कार्य आईपीएच करता है तो परिषद चाहती है कि आईपीएच विभाग नई योजना के लिए पैसे लगाए।
उधर, आईपीएच का मानना है कि शहर नगर परिषद के अधीन आता है, जिसके चलते नई योजना के लिए शहरी विकास विभाग से धन का प्रावधान होना चाहिए। दो विभागों की इस उलझन में शहर की हजारों की आबादी को नुकसान उठाना पड़ रहा है, क्योंकि चिकनी नदी से आने वाली राइजिंग मेन कई बार नदी के तेज बहाव में बह चुकी है, वहीं कई मर्तबा जगह-जगह से लीक होती रही है। कुल मिलाकर नालागढ़ शहर को होने वाली जलापूर्ति के मुख्य स्रोत नंगल को विभाग अपग्रेड नहीं कर सका है।
उठाऊ पेयजल योजना नंगल से नालागढ़ शहर में जलापूर्ति होती है। नंगल में पेयजल का मुख्य स्रोत है। चिकनी नदी किनारे से राइजिंग मेन से पानी भल्लेश्वर महादेव के दो टैंकों में आता है। एक टैंक की 10 लाख लीटर और दूसरे की 9 लाख लीटर है। इसके बाद पानी लोगों को वितरित किया जाता है। भल्लेश्वर महादेव में स्थित एक टैंक से शहर के वार्ड-2,3,4,8 व 9 सहित रखराम सिंह कॉलेज को पेयजल आपूर्ति होती है। जबकि दूसरे टैंक से पहले पानी गुरुद्वारे के पास बनाए स्टोरेज टैंक में आता है, जिससे वार्ड-1,2,5,6 व 7 को सप्लाई दी जाती है। नालागढ़ शहर के तहत 9 वार्ड आते हैं, जिसमें करीब 40 हजार लोग रहते हैं और औद्योगिक बयार के बाद कामगारों नालागढ़ शहर में किराए के मकान लेकर रह रहे हैं। ऐसे में पेयजल आपूर्ति प्रभावित हो तो हजारों की आबादी को परेशानी झेलनी पड़ती है।
नगर परिषद अध्यक्ष मनोज वर्मा ने कहा कि शहर के लिए नई पेयजल योजना को लेकर परिषद ने बीते दिनों सरकार को पत्राचार करके मांग की है, ताकि शहर की जलापूर्ति में किसी प्रकार की परेशानी न हो।
एक्सईएन आईपीएच विजय ढटवालिया ने कहा कि नगर परिषद द्वारा सरकार को किए गए पत्राचार के बाद मामला आईपीएच के पास आया था, जिस पर विभाग ने अपनी रिपोर्ट बनाकर सरकार को वापस प्रेषित कर दी है।