दाड़लाघाट में पार्किंग समस्या से नहीं मिली निजात
दाड़लाघाट (सोलन)। विधानसभा चुनाव में प्रदेश की सबसे हॉट सीट अर्की में जनसमस्याएं भी बहुत हैं। यहां ट्रकों की अपार संख्या के आगे उन्हें खड़ा करने की जगह कम पड़ गई है। ये ट्रक सड़क किनारे या हाइवे पर खड़े रहते हैं, जिससे जाम और हादसे दोनों की संभावनाएं बनी रहती हैं। ट्रकों की संख्या पिछले कुछ सालों में इतनी बढ़ गई है कि उन्हें खड़ा करने के लिए बनाया गया ट्रक यार्ड भी छोटा पड़ गया है। जाम से निजात दिलाने के लिए प्रशासन ने सड़क के कुछ हिस्से को नो पार्किंग जोन तो घोषित किया है, लेकिन पार्किंग की कोई व्यवस्था न होने की वजह से लोग अपने वाहन नो पार्किंग जोन और सड़क किनारे खड़ा करने को मजबूर हैं। यहां पांच बैंकों की शाखाओं के अलावा सरकारी तथा गैर सरकारी कार्यालय हैं, जहां काम करवाने के लिए लोग रुकते हैं और वाहनों को सड़क पर ही खड़ा करना पड़ता है। दूसरी कोई पार्किंग की जगह उपलब्ध नहीं है। लोगों का हर महीने चालान होता रहता है। सड़क किनारे खड़े वाहनों से जहां हाइवे बाधित होता है, वहीं हादसों का भी अंदेशा बना रहता है। जाम की स्थिति में पैदल राहगीरों खासकर स्कूली बच्चों को भारी परेशानी झेलनी पड़ती है। हाइवे जाम होने पर सैलानी भी परेशान होते हैं। जाम से व्यापारी वर्ग भी परेशान है। दुकानों के आगे वाहन खड़े रहते हैं। पार्किंग को लेकर नोकझोंक और लड़ाई आम बात है। डिस्पेच कम होने या ट्रकों की अनलोडिंग में देरी पर कंपनी के मुख्य गेट से लेकर अंबुजा चौक पर ट्रकों की लंबी कतार लग जाती है, जिससे हाइवे बाधित होता है। सड़कों पर दुकानदारों की ओर से किया गया अस्थायी अतिक्रमण भी जाम के लिए जिम्मेदार है। जाम खुलवाने में पुलिस के खूब पसीने छूटते हैं। महीने में दो बार गाड़ियों की पासिंग भी होती है, जो हाइवे किनारे ही होती है। इसकी वजह से भी जाम की स्थिति बनती है। पासिंग के लिए अलग से पार्किंग की व्यवस्था होनी चाहिए। इसके अलावा दो और चारपहिया वाहनों की संख्या में भी लगातार बढ़ोतरी हो रही है। वाहनों की संख्या इतनी ज्यादा है लेकिन पार्किंग की व्यवस्था नहीं है। सड़कों पर क्षमता से अधिक दबाव है। नौ टन पास सड़कों और पुलों पर से 25 टन के मल्टी एक्सल ट्रक चल रहे हैं।
दाड़लाघाट में पंजीकृत हैं 3174 ट्रक
दाड़लाघाट में पांच ट्रक ऑपरेटर सोसायटियों में तीन हजार 174 ट्रक हैं। इनमें 783 मल्टी एक्सेल ट्रक शामिल हैं, जो दिन-रात सड़कों पर चलते हैं। हल्के मालवाहक यूनियनों के लिए पार्किंग की कोई व्यवस्था नहीं है। आरएलए ऑफिस अर्की में 4400 कारें, 570 पिकअप 100 माजदा टिप्पर, 3200 मोटरसाइकिल और 1760 स्कूटर पंजीकृत हैं। सबके लिए पार्किंग सुविधा नहीं है। अधिकांश वाहन सड़क पर ही पार्क होते हैं।
पार्किंग के लिए जमीन की समस्या : प्रधान
पंचायत प्रधान सुरेंद्र शुक्ला का कहना है कि पार्किंग के लिए जमीन की समस्या आ रही है। जो जगह उपलब्ध है, वहां पार्किंग बनाना नामुमकिन है। इसके अलावा लोगों की निजी भूमि है। भूमि उपलब्ध होने पर पार्किंग का निर्माण करवाया जाएगा। प्रबंधन के साथ मिल कर ट्रक यार्ड के विस्तार के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।
स्थानीय लोगों हंसराज, हेमराज, ललित, लालचंद, मनीराम और ओमी का कहना है कि कंपनी के ढुलाई कार्य में लगे ट्रकों की संख्या में काफी बढ़ोतरी हुई है। कंपनी का ट्रक यार्ड भी अब छोटा पड़ने लगा है। यहां सिर्फ 500 ही ट्रक खड़े करने की क्षमता है। वाहनों के अनुपात में ट्रक यार्ड का विस्तार नहीं हो पाया। इस वजह से ट्रक सड़क किनारे खड़े किए जाते हैं, जो जाम और हादसों का कारण बनते हैं।