बद्दी (सोलन)। औद्योगिक पैकेज के बाद एशिया की 35 फीसदी दवाओं को बाहर भेजने वाले हिमाचल के उद्योगों में निर्मित दवाएं केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) की जांच में खरी नहीं उतर रही हैं।
सीडीएससीओ के ताजा रिपोर्ट के तहत सितंबर माह में प्रदेश के 10 उद्योगों की दवाओं के सैंपल फेल हुए हैं, जबकि जनवरी से लेकर सितंबर माह तक 9 माह में 88 दवाओं के सैंपल फेल हो चुके हैं। हर माह आने वाली सीडीएससीओ की रिपोर्ट में हिमाचल के उद्योगों की दवाओं के सैंपल फेल हुए हैं या फिर सब स्टैंडर्ड पाई गई हैं।
केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) की ताजा रिपोर्ट के तहत जांच में हिमाचल के 10 उद्योगों में निर्मित दवाएं गुणवत्ता मानकों पर खरा नहीं उतर पाई हैं। ये दवाएं बद्दी, बरोटीवाला, पांवटा साहिब, संसारपुर टैरेस स्थित उद्योगों में निर्मित हुई हैं। इसके अलावा देशभर की 11 अन्य दवा कंपनियों में निर्मित दवाएं भी गुणवत्ता मानकों पर खरा नहीं उतर सकी हैं। इन दवाओं में डायबटीज, गैस्ट्रिक, पेन किलर, बुखार सहित अन्य एंटीबायोटिक दवाएं शामिल हैं। ये दवाएं वजन में असमानता, विघटन, स्टेरलिटी जैसे मानकों पर खरी नहीं पाई गई हैं।
सीडीएससीओ की रिपोर्ट के बाद विभाग हरकत में आता है और सैंपल फेल होने वाली दवाओं को मार्केट से उठा लिया जाता है। देशभर में बनाई जाने वाली दवाओं के सैंपल एकत्रित किए जाते हैं, जिनकी मुंबई, गुवाहाटी, कोलकाता, चंडीगढ़ की औषधि परीक्षण प्रयोगशालाओं में जांच करवाई जाती है।
राज्य दवा नियंत्रक नवनीत मरवाहा ने कहा कि कि प्राधिकरण समय-समय पर उद्योगों में जांच पड़ताल करता है और ड्रग एंड कॉस्मेटिक एक्ट के तहत कार्रवाई भी करता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जलवायु और आर्र्दता सहित अन्य कई फैक्टर दवाओं के मानकों को पूरा नहीं कर पाते हैं। उन्होंने कहा कि राज्य दवा नियंत्रक प्राधिकरण अपनी लैब बनाने की कसरत तेज किए हुए है।