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पुलिस की मौजूदगी में हुआ नाप-नपाई का काम

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नालागढ़ (सोलन)। पहली मई को जिला सोलन के तहत कसौली में अवैध निर्माण तोड़ने के दौरान गोलीकांड में नगर नियोजन अधिकारी व लोनिवि के बेलदार की हुई मौत के बाद प्रशासन अलर्ट हो गया है। नालागढ़-रोपड़ मार्ग पर मेहता कॉलोनी में अनधिकृत व अवैध निर्माण को लेकर उच्च न्यायालय द्वारा इनके निर्माण को स्वयं तुड़वाने और एसआईटी द्वारा जांच के बाद कार्रवाई न करने पर उपमंडल के अधिकारियों के हाथ-पांव फूले हुए हैं। अवैध निर्माण की पैमाइश करने में प्रशासन, राजस्व व नगर परिषद की टीमें जुटी हुई हैं। एसआईटी की रिपोर्ट में इस कॉलोनी में 23 प्लॉटों पर हुए अवैध निर्माण को तुड़वाने को लेकर नाप-नपाई का कार्य पुलिस की निगरानी में हो रहा है। प्रशासन इसे जल्द तोड़ सकता है और यहां धारा 144 लागू करके हथियारों को जमा करवाने के आदेश जारी कर सकता है। सोमवार को राजस्व विभाग व परिषद की नाप-नपाई करने गई टीम के सामने ही बहसबाजी हो चुकी है। अब प्रशासन किसी भी प्रकार का कोई जोखिम नहीं उठाना चाहती है, इसलिए मंगलवार को पुलिस की मौजूदगी में नाप-नपाई का काम किया गया।
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माननीय उच्च न्यायालय ने जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान जहां इस अवैध निर्माण को तोड़ने के लिए स्वयं मालिकों को हिदायत दी है, वहीं इस मामले की जांच करने वाली एसआईटी के सदस्यों का भी पूरा ब्यौरा मांगा है। एसआईटी ने 2014 में कुल 57 पृष्ठों की रिपोर्ट तैयार की थी और अब हाईकोर्ट ने पूछा है कि 2014 में एसआईटी की रिपोर्ट सौंपने के बाद से अब तक जिम्मेदार और निर्णय लेने में सक्षम अधिकारियों ने कार्रवाई क्यों नहीं की। हाईकोर्ट ने 25 जून को हुई सुनवाई के दौरान मुख्य सचिव को अवैध रूप से बनाए गए भवनों को गिराने के आदेश दिए हैं। नालागढ़ में बनी यह कॉलोनी कुल 31.13 बीघा भूमि में फैली है। नियम के अनुसार कुल जमीन का दस प्रतिशत भाग ग्रीन लैंड के तौर पर पार्क के लिए छोड़ना होता है। इस कॉलोनी के इर्द गिर्द तीन पार्क, स्कूल व नर्सिंग होम बनने प्रस्तावित थे, लेकिन अब इन पार्कों की जगह करीब 62 दुकानें बन चुकी हैं। इस मामले के संज्ञान में आते ही अब उपमंडल स्तर के अधिकारी भी सकते में आ गए हैं और जगह-जगह पैमाइश की जा रही है और एसडीएम ने उपमंडल स्तर के अधिकारियों की बैठक लेकर इसकी फीडबैक भी ली है। एसडीएम नालागढ़ प्रशांत देष्टा ने कहा कि यदि लोगों ने स्वयं अवैध कब्जे तोड़े तो ठीक है और यदि लाजमी हुआ तो धारा 144 लगवाकर हथियारों को जमा करवाने के आदेश देकर इस अवैध निर्माण को प्रशासन तुड़वाएगी।

वर्ष 2014 में डाली गई थी जनहित याचिका
इस संदर्भ में राकेश गौतम पुत्र मुखारविंद गौतम निवासी वार्ड-7 नालागढ़ व नवनीत भारद्वाज पुत्र कृष्ण कुमार भारद्वाज निवासी वार्ड-4 नालागढ़ ने 27 मई, 2014 को माननीय उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर की थी। इस मामले की सुनवाई हुई और संबंधित दस्तावेजों की जांच पड़ताल की गई। मामला अदालत में विचाराधीन ही था कि मेहता कॉलोनी के ही एक व्यक्ति ने फिर से इसी कॉलोनी को लेकर जनहित याचिका कुछ दिन पहले ही डाली। इस मामले ने फिर से तूल पकड़ लिया और माननीय उच्च न्यायालय ने इस पर कड़ा संज्ञान लिया है। इस पर सरकार से भी जवाबतलबी की गई है। वहीं अवैध निर्माण को गिराने को कहा है, जबकि एसआईटी के सदस्यों के नामों का पूरा ब्यौरा मांगा है। माननीय अदालत का कहना है कि जब एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में इसे पहले ही अवैध बता दिया था तो इस पर कार्रवाई क्यों नहीं की गई है।
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