सोलन। शहर में अवैध बने फ्लैट और चोरदरवाजे से उनकी बिक्री के खिलाफ दाखिल शिकायत पर करीब दो सालों से कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है। इस बीच प्रशासन की ओर से तहसीलदार कार्यालय को तीन बार रिमांइडर भी भेजा जा चुका है। लेकिन हर बार मामले पर कार्रवाई की जगह उसे आगे के लिए टाल दिया जाता रहा। मामले में शिकायतकर्ता प्रेम सिंह टंगणिया ने राजस्व अधिकारियों की मिलीभगत से टीसीपी और नगर परिषद को लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान होने की बात कही है। सोलन में पत्रकारों के समक्ष प्रेम सिंह टंगणियां ने कहा कि शहर के तीन अपार्टमेंट में बेचे गए कुल 13 फ्लैट की जानकारी जुटाई थी। इन फ्लैट को सिर्फ शपथपत्र के आधार पर बेच दिया था। टीसीपी और नप की एनओसी नहीं ली गई। इनकी कीमत करोड़ों में है। उन्होंने बताया कि इसकी शिकायत उन्होंने वर्ष 2016 में कर दी थी। टीसीपी के माध्यम से जिला प्रशासन को मामले की जांच के निर्देश मिले हैं जिसमें उपायुक्त ने तहसीलदार सोलन को मामले की जांच कर रिपोर्ट सौंपने को कहा। इस मामले में अब तक तीन बार रिमांइडर जिला प्रशासन की ओर से तहसीलदार को भेजे जा चुके हैं। लेकिन रिमांइडर के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। उन्होंने कहा कि जिन 13 फ्लैट का पंजीकरण हुआ है उनमें नियम पूरे नहीं किए हैं। प्रदेश सरकार से मांग की है कि सोलन में अवैध रूप से बनने के बाद बिक्री हो रहे फ्लैट पर नियम कानून सख्ती से लागू किए जाएं, जिन फ्लैटों को अनैतिक रूप से बेचा है उन पर कार्रवाई अमल में लाई जाए।
मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी : तहसीलदार
तहसीलदार उत्तम शर्मा ने कहा कि मामला उनके ध्यान में नहीं है। यदि कोई जांच होनी है तो उसे जल्द से जल्द पूरा किया जाएगा। राजस्व विभाग किसी के दबाव में आकर काम नहीं करेगा। मामले की निष्पक्ष जांच होगी और कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।