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प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आदेशों की नाफरमानी

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सोलन।प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के नोटिस का असर धरातल पर नहीं हुआ है। बोर्ड ने तीस मई को तीन दिन की मोहलत पर सात संस्थानों की बिजली काटने के नोटिस जारी किए थे। लेकिन इन नोटिसों पर एक हफ्ता गुजर जाने के बाद भी अमल नहीं हुआ। बिजली बोर्ड की वजह से सभी संस्थान वैसे ही चल रहे हैं जैसे नोटिस जारी होने के पूर्व चल रहे थे।
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प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने अश्वनी खड्ड को दूषित कर रहे साधुपुल में संचालित 12 कमरों के गेस्ट हाउस को सबसे पहले नोटिस दिया था। इसमें बिजली बोर्ड को तीन दिन में कार्रवाई के निर्देश थे। लेकिन यह कार्रवाई अभी तक नहीं हो पाई है। गेस्ट हाउस ने सीवरेज सीधे अश्वनी खड्ड में खोल रखी है। इसके अलावा मझगांव में संचालित एक मैरिज पैलेस, होटल, समलेच में दो मोटर और आटो केयर सेंटर, सनवारा में संचालित होटल और घटटी में चल रहे दो फार्मा उद्योगों को नोटिस भेजे थे। इन सभी की बिजली काटने के बारे में बोर्ड अधिकारियों को सूचित कर दिया था। आगे की कार्रवाई बिजली बोर्ड ने करनी थी और इसकी रिपोर्ट प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को भेजनी थी। लेकिन बिजली बोर्ड ने अपने स्तर पर ही कार्रवाई को विराम लगा दिया। बिजली बोर्ड के अधिकारियों का कहना है कि 30 मई को जारी हुए नोटिस उन्हें मिले ही नहीं। जैसे ही नोटिस मिलेंगे कार्रवाई हो जाएगी।

संस्थानों पर नरमी, नौकरी खतरे में डालना : परमार
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिशासी अभियंता अतुल परमार ने कहा कि 30 मई को नोटिस भेजे थे। डाक से नोटिस अब तक मिल जाने चाहिए थे। यदि नोटिस मिलने के बाद भी बिजली बोर्ड के अधिकारी कनेक्शन काटने में आनाकानी कर रहे हैं तो इसकी शिकायत आला अधिकारियों से की जाएगी। नोटिस जारी होने के बाद संस्थानों को बचाने का मतलब सीधे तौर पर नौकरी से खिलवाड़ करना है। बिजली बोर्ड के अधिकारियों को इस मामले में सीधी कार्रवाई करनी चाहिए।
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नहीं मिली है नोटिस की कॉपी : बिजली बोर्ड
कंडाघाट बिजली बोर्ड के सहायक अभियंता रवि कुमार ने कहा कि उन्हें बुधवार तक नोटिस की कॉपी नहीं मिली है। वह कार्यालय में नहीं हैं यदि डाक से कॉपी आई होगी तो उन्होंने इसे नहीं देखा है। जैसे ही कॉपी देखेंगे उसके हिसाब से कार्रवाई की जाएगी। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने यदि तीन दिन में बिजली काटने को लिखा होगा तो नोटिस रिसीव करने के बाद गेस्ट हाउस की बिजली काट दी जाएगी।
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