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मुसाफिरों की जान से सरेअाम हो रहा खिलवाड़

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- फोटो : अमर उजाला
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सोलन। राजगढ़ मार्ग का ओच्छघाट स्टेशन। वक्त सुबह के आठ बजकर बीस मिनट हुए हैं। विश्वविद्यालय जाने वाले छात्रों की एक बहुत बड़ी भीड़ सड़क पर बस के इंतजार में है। तभी सवारियों से लदी एक निजी बस आकर रुकती है। बस में बैठने लायक जगह नहीं है। बावजूद इसके छात्र बस में चढ़ गए, जितने अंदर आ सके वो वहीं फंस गए जो बचे उन्होंने छत का रुख कर लिया। छत संभालने वालों में छात्राएं भी पीछे नहीं रहीं। आखिर युनिवर्सिटी समय पर पहुंचना जो था। यह नजारा यहां लगभग आम है। लेकिन प्रशासन और एचआरटीसी की नींद अभी तक नहीं जागी है।
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प्रशासन और एचआरटीसी चाहे तो हर रोज सुबह इसी स्टॉप से एक बस लगाकर छात्रों को राहत दे सकते हैं। लेकिन ऐसा नहीं हो रहा। लोग हर रोज अपने बच्चों को इस बस में भेड़-बकरियों की तरह भेजने को मजबूर हैं। निजी बस सोलन के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों के सामने से होकर गुजरती है। यही वजह है कि जो समय के पाबंद छात्र अपनी जान की परवाह किए बगैर इस बस में सफर कर रहे हैं। ज्यादातर विवि सुल्तानपुर मार्ग पर हैं और यह मार्ग एक वाहन के गुजरने के लायक ही है। दूसरे वाहन के आने पर पास देने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ती है। पूरे मार्ग पर एक तरफ सीधी ढांक और नाले हैं। यहां चालक की हल्की सी चूक बड़े हादसे को अंजाम दे सकती है। लेकिन इसे व्यवस्था की चूक के साथ प्रशासनिक प्रबंधों की ढील भी माना जाएगा जो इस मार्ग पर अतिरिक्त बस चलाने में सक्षम नहीं हैं।

मालवाहक वाहन में ढोई जा रही सवारियां
यातायात नियम तोड़ने वालों में सिर्फ बस चालक ही नहीं है बल्कि शहर के बाहर अन्य लोग भी कोई कसर नहीं छोड़ते। यहां सामान ढोने वाले वाहनों पर सवारियों को बैठाकर ढोना आम बात है। कई बार यह सफर सोलन से सिरमौर तक का भी रहता है। खासतौर पर सोलन और सिरमौर जिलों को जोड़ने वाली सड़क पर सामान ढोने वाली गाड़ियों को यात्रियों को ले जाने का चलन ज्यादा है। मंगलवार को नूरपुर में हादसे के बाद जब अमर उजाला की टीम सोलन की सड़कों पर यातायात प्रबंधों का मुआयना कर रही थी तो यह नजारा भी देखने को मिल गया। हालांकि इस दौरान पुलिस ने भी चालान का अभियान चलाया। लेकिन तब तक यह पिकअप जिला की सरहद से बाहर जा चुकी थी।
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नियमों पर खरा नहीं उतर रहे स्कूली वाहन
शहर में चल रहे कई निजी स्कूल अब भी बिना गाड़ियों के हैं। इन स्कूलों ने निजी वाहन किराये पर ले रखे हैं। इन वाहनों के माध्यम से बच्चों को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाया जा रहा है। स्कूल का अपना वाहन न होने की वजह से इनमें सुरक्षा के उपकरण भी नहीं हैं। न ही चालक वर्दी में रहते हैं। यह वाहन सर्वोच्च न्यायालय की गाइड लाइन जिसमें स्कूल के लिए येलो बस चलाने की ही अनुमति दी है उसे भी पूरा नहीं कर रहे हैं।

मामले की जांच करेंगे : एसडीएम
एसडीएम आशुतोष गर्ग ने कहा कि यात्रियों की जान जोखिम में डालने वाले चालक बख्शे नहीं जाएंगे। यदि बसें कम हैं तो छात्रों को इसकी डिमांड करनी चाहिए। उन्हें किसी भी कीमत पर कानून तोड़ने की इजाजत नहीं दी जा सकती है। इस मामले में चालक भी उतना ही दोषी है जो छात्रों व अन्य सवारियों को छत पर बैठा रहा है। उन्होंने कहा कि औचक निरीक्षण किया जाएगा और इस दौरान कोई भी चालक या बस इस हालत में मिली तो उस पर कार्रवाई होगी।
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