सोलन। लोगों की आस्था के केंद्र मां शूलिनी मेले में भंडारे का रंग इस बार भी जमेगा लेकिन थर्मोकोल के इस्तेमाल पर पूरी तरह से प्रतिबंध रहेगा। हाईकोर्ट के आदेश के बाद प्रशासन ने इसकी तैयारियां कर ली हैं। भंडारे लगाने के इच्छुक श्रद्धालुओं को कागज की बनी प्लेटों व गिलास का इस्तेमाल करना होगा। थर्मोकोल पर मेेले के दौरान पूरी तरह से प्रतिबंध रहेगा। लोग जब प्रशासन से भंडारा लगाने की इजाजत मांगने जाएंगे उन्हें भी यह नसीहत इजाजत के साथ दे दी जाएगी कि वह थर्मोकोल प्लेट का इस्तेमाल न करें।
प्रदेश सरकार ने पहले ही थर्मोकोल की प्लेट और कप के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगा दिया है। अब हाईकोर्ट ने भी सोलन प्रशासन को थर्मोकोल का इस्तेमाल सीमित दायरे में करने के आदेश दिए हैं। शहर में तीन दिवसीय राज्यस्तरीय शूलिनी मेला 22 जून से शुरू होगा। तीन दिन तक चलने वाले इस मेले के दौरान करीब सौ भंडारे लगाए जाते हैं। इनमें ज्यादातर भंडारों में बैठने का प्रबंध नहीं होता। लोग चलते-फिरते ही प्रसाद ग्रहण करते हैं। ऐसे में जूठन और इस्तेमाल की हुई प्लेट तथा गिलास की गंदगी पूरे शहर में फैल जाती है। इसे देखते हुए प्रशासन भी इस बार काफी अलर्ट है। उपायुक्त ने साफ संकेत दिए हैं कि भंडारे में थर्मोकोल का इस्तेमाल नहीं होने दिया जाएगा।
भंडारा आयोजकों को पूरी करनी होगी शर्त : डीसी
डीसी विनोद कुमार ने कहा कि थर्मोकोल पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। भंडारा लगाने की इजाजत मांगने वालों को थर्मोकोल को इस्तेमाल न करने की शर्त भी पूरी करनी होगी। कहा कि प्रशासन शहर को स्वच्छ व सुंदर बनाए रखने के लिए हर कदम उठाएगा। उन्होंने कहा कि भंडारे में प्रसाद बांटने और ग्रहण करने वाले दोनों को शहर की स्वच्छता का ख्याल रखना होगा।
तीन दिन में लगते हैं सौ से ज्यादा भंडारे
मां शूलिनी मेले के दौरान शहर में सौ से अधिक भंडारे लगाए जाते हैं। मुख्य बाजार और माल रोड पर सबसे ज्यादा भंडारों का आयोजन होता है। तीन दिन तक सुबह से शाम तक चलने वाले इन भंडारों की वजह से मेले को खास महत्व मिला है। अपनी आस्था के अनुसार श्रद्धालु भंडारे लगाते हैं। भंडारे लगाने की इजाजत प्रशासन प्रदान करता है जबकि साफ-सफाई की जिम्मेदारी नप के पास रहती है।