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सोलन अस्पताल में नहीं मिले स्त्री रोग विशेषज्ञ, दर-दर भटकने को मजबूर हुए परिजन

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स्त्री रोग विशेषज्ञ न होने से दर-दर भटके परिजन - फोटो : अमर उजाला
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अमर उजाला ब्यूरो

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सोलन।
क्षेत्रीय अस्पताल सोलन से विवाद का नाता छूट नहीं रहा है। अस्पताल के साथ नया विवाद गर्भवती को ऐन मौके पर रेफर करने का जुड़ गया है। आईआरडीपी से ताल्लुक रखने वाली महिला को महंगे दामों पर उपचार नर्सिंग होम में प्रसव करवाना पड़ा। ऑपरेशन के बाद महिला ने बच्ची को जन्म दिया।

समलेच की निशा देवी पत्नी तीर्थ राम को प्रसव पीड़ा के बाद बुधवार को क्षेत्रीय अस्पताल सोलन लाया गया। निशा के ससुर केवल राम के अनुसार वे करीब 12 बजे अस्पताल पहुंचे। अस्पताल स्टाफ ने निशा को दाखिल कर लिया। करीब पांच बजे निशा देवी को अस्पताल में रखा गया और इसके बाद डॉक्टर न होने की बात कहकर उसे कमला नेहरू अस्पताल शिमला रेफर कर दिया गया। केवल राम के अनुसार जब वे उसे शिमला ले जाने की तैयारी कर रहे थे तो निशा देवी को तेज पीड़ा शुरू हो गई। इसके चलते उन्होंने सोलन में ही एक निजी नर्सिंग होम में निशा देवी को दाखिल करवा दिया। चिकित्सकों ने बच्चे और मां की हालत नाजुक बताते हुए ऑपरेशन कर दिया।
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केवल राम ने बताया कि उनका परिवार मेहनत-मजदूरी करता है। वे आईआरडीपी में शामिल हैं। उनके पास निजी नर्सिंग होम में उपचार करवाने लायक पैसे नहीं थे। लेकिन वे निशा देवी को शिमला ले जाने की कोशिश करते तो शायद रास्ते में दोनों की मौत हो सकती थी। इसे देखते हुए उन्हें मजबूरी में नर्सिंग होम में उपचार करवाना पड़ा है। जहां उनसे 25 से 30 हजार रुपये की फीस लेने की बात कही जा रही है। उन्होंने कहा कि अव्यवस्था के लिए अस्पताल प्रबंधन जिम्मेदार है लेकिन इसकी कीमत गरीब और कमजोर वर्ग को चुकानी पड़ रही है। अस्पताल में उनका पूरा उपचार मुफ्त होना था। लेकिन डॉक्टर न होने की वजह से उन्हें आर्थिक और मानसिक दोनों परेशानियां से जूझना पड़ रहा है।
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इस बारे में क्षेत्रीय अस्पताल के कार्यवाहक चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राजन उप्पल का कहना है कि बुधवार को दोनों स्त्री रोग विशेषज्ञ छुट्टी पर थे। इस वजह से ऑपरेशन नहीं हो पाए।

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