आधुनिक भवन होने के बावजूद इमरजेंसी, जांच और भर्ती सुविधाएं अधूरी रोज 300–400 ओपीडी
सीबीसी मशीन खराब, कैंटीन के अभाव में दाखिल मरीजों को घर से लाना पड़ रहा खाना
ओमपाल सिंह
बद्दी (सोलन)। औद्योगिक क्षेत्र बद्दी का 100 बेड का सरकारी अस्पताल आधुनिक भवन और सुविधाओं के दावों के बीच खुद गंभीर हालत से जूझ रहा है। करोड़ों रुपये खर्च कर आधुनिक भवन तो बना दिया, लेकिन मरीजों को भर्ती करने, जरूरी जांच और विशेषज्ञ उपचार की व्यवस्था आज भी अधूरी है। हालत यह है कि आपातकाल में आने वाले अधिकांश मरीजों को प्राथमिक उपचार देकर पीजीआई या अन्य संस्थानों के लिए रेफर किया जा रहा है। दवाओं से लेकर बाकी जरूरी जांच के लिए मरीजों को निजी लैबों और मेडिकल स्टोरों का सहारा लेना पड़ रहा है।
बद्दी अस्पताल को एक साल पहले करोड़ों रुपये का भवन मिला है। इस भवन में 100 बेड लगाए गए हैं, लेकिन अभी तक रोगियों को सिर्फ दिन में ही भर्ती किया जाता है। कारण बताया जा रहा है कि यहां अभी कैंटीन नहीं है, ऐसे में दाखिल मरीजों को घर से खाना पहुंचाना पड़ रहा है। रात के समय आने वाले आपातकालीन मरीजों को प्राथमिक उपचार देकर भेज दिया जाता है। अस्पताल में रोज 300 से 400 तक ओपीडी होती है, लेकिन रोगियों को दवाएं बाहर से ही लेनी पड़ रही है। यहां पर किडनी, लीवर व विडाल के टेस्ट भी बाहर से करवाने पड़ रहे है। सीबीसी की मशीन खराब होने से यह टेस्ट अभी यहां नहीं हो रहे हैं। एक्सरे चिकित्सक के फोन पर ही भेज दिए जाते हैं। रोगी को अगर दूसरे संस्थान में जाना पड़े तो दोबारा एक्सरे कराना पड़ता है।
केस स्टडी-1
20 जून को यहां पर बद्दी के ऋषि अपार्टमेंट से मनोज कुमार को सांस की तकलीफ होने पर लाया गया था। उन्हें वेंटिलेटर की जरूरत थी, लेकिन यहां पर प्राथमिक उपचार के बाद पीजीआई रेफर कर दिया गया है। मरीज को काफी परेशानी हुई।
केस स्टडी-2
नालागढ़ के अमित सिंह (73) सड़क दुर्घटना में घायल हो गए थे। उन्हें 22 जून को बद्दी अस्पताल में लगाया गया। यहां पर एमआरआई समेत कई जरूरी टेस्ट की सुविधा न होने के कारण यहां से पीजीआई रेफर कर दिया गया।
कोट
जिन रोगियों को जरूरत होती है, उन्हें रात के समय रोका भी जाता है। अभी कैंटीन की सुविधा न होने से उन्हें भोजन घर से मंगाया जा रहा है। सीबीसी की मशीन खराब होने से अभी टेस्ट नहीं हो रहे। अन्य टेस्ट यहां पर सभी होते हैं। रेडियोलाॅजिस्ट दो दिन के लिए अस्पताल में आते हैं, इसलिए दो दिन ही अल्ट्रासाउंड हो रहे हैं। जल्द ही एक्सरे मशीन का प्रिंटर ठीक होने पर रोगियों को फिल्म उपलब्ध कराई जाएगी।
डॉ. महावीर चौहान, एसएमओ, बद्दी अस्पताल