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Sirmour News: उत्तराखंड-हिमाचल को जोड़ने वाले यमुना पुल को बना खतरा

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- बरसात के मौसम में हिमाचल राज्य सीमा यमुना पुल के समीप अवैध खनन करते खननकारी: संवाद
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उत्तराखंड-हिमाचल को जोड़ने वाले यमुना पुल को बना खतरा
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बरसात में भी पांवटा यमुना नदी में अवैध खनन रुकने का नहीं ले रहा नाम
उपायुक्त और पुलिस अधिकारियों के निर्देशों के बाद भी हो रहा अवैध खनन
चंद सिक्कों के लालच में मजदूरों का जीवन दांव पर लगा रहे खननकारी

सुरेश तोमर
पांवटा साहिब (सिरमौर)। उपायुक्त सिरमौर व एएसपी बरसात के मौसम में नदी नालोंं में नहीं उतरने के निर्देश जारी कर चुके हैं लेकिन अवैध खननकारी किसी की एक सुनने को तैयार नजर नहीं आ रहे हैं। नियम कानूनों व निर्देशों को धता बता कर दिनदहाड़े यमुना नदी से रेत बजरी अवैध रूप से निकाल रहे हैं। इनकी बेखौफ कार्यशैली तो जैसे जिला प्रशासन, खनन विभाग, वन विभाग व स्थानीय पुलिस को ही उल्टा दिनदहाड़े खनन कर चुनौती देती नजर आ रही है।
बता दें कि उत्तराखंड-हिमाचल को जोड़ने वाले यमुना पुल की हालत पहले ही खस्ताहाल है। इसके लिए करीब सवा करोड़ बजट प्रावधान भी मरम्मत के लिए पिछले वर्ष पहुंचा था लेकिन मरम्मत का कार्य ही शुरू नहीं हो सका। पुल की मरम्मत तो छोड़िए ठीक इसके आसपास अवैध खननकारी काफी महीनों से सक्रिय रहे हैं। आलम ये हो चला है कि दशकों पुराने इस पुल के बुनियादी पीलरों तक खननकारी खोदते हुए पहुंच गए हैं। राष्ट्रीय संपत्ति एनएच प्राधिकरण का पुल खतरे के दायरे में आ गया है। मीडिया में खबरों के बाद एक दो दिन काम बंद रहता है। फिर बदस्तूर अवैध खननकारी पुल के आसपास खनन करते नजर आते
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हैं। इनकी हिमाकत तो देखिए राष्ट्रीय संपत्ति को क्षति पहुंचाने को दिनदहाड़े कार्य
करते हैं। खनन विभाग, प्रशासन, पुलिस, वन विभाग समेत कई विभागों को अवैध
खनन के खिलाफ कार्रवाई की शक्तियां मिली हैं लेकिन राष्ट्रीय संपत्ति को क्षति
से रोकने को ये विभाग कोई आगे आने से कतराते रहे हैं। करीब दो सप्ताह पहले
जिला प्रशासन सिरमौर बरसात में नदी-नालों में उतरने, रेत बजरी निकालने, वाहन ले जाने व नहाने को नदी में उतरने के लिए आगाह कर चुके हैं। तीन दिन पहले ही एएसपी एवं डीएसपी पांवटा ने भी एडवाइजरी जारी की थी लेकिन अवैध खननकारी दिनदहाड़े प्राचीन देईजी साहिबां मंदिर के ठीक नीचे यमुना नदी तथा यमुना पुल के समीप धड़ल्ले से बेखौफ होकर रेत बजरी उतार रहे हैं। ऐसा करते हुए दर्जनों मजदूरों का जीवन भी खतरे में डाल रहे हैं।
आईपीएस अधिकारी, एएसपी अदिति सिंह ने कहा कि इस तरह की सूचनाएं मिल रही हैं। बरसात के मौसम में नदी नालों में नहीं उतरने की एडवाइजरी जारी की जा चुकी है। फिर भी नदियों में उतर कर अवैध खनन करने वालों के खिलाफ नियमानुसार उचित कार्रवाई की जाएगी।
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मजदूरों का जीवन बचाने को सख्ती जरूरी
- ऊपरी पहाड़ी क्षेत्रों में ज्यादा बारिश होने पर गिरि नदी पर बने रेणुकाजी बांध तथा उत्तराखंड के डाक पत्थर व आसान बैराज के गेट खोल कर पानी यमुना नदी में छोड़ दिया जाता है जिससे नदी का जल स्तर अचानक बढ़ जाता है। हर वर्ष कई लोग नदी के बीच फंसते रहे हैं। अवैध खनन रेत बजरी उठाने वाले मजदूरों का जीवन ऐसे में खतरे में पड़ सकता है। इसलिए मजदूरों का अनमोल जीवन बचाने को सख्ती जरूरी है।

संवाद
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