सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शिलाई मानो इन दिनों खुद बीमार चल रहा है। केंद्र में चिकित्सकों के अलावा स्वास्थ्य केंद्र की देखरेख करने वाले दर्जनों कर्मचारियों के पद खाली हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि जब स्वास्थ्य केंद्र ही स्वयं में बदहाल बना है तो यहां मरीजों की देखभाल तथा उपचार कैसे हो सकता है। ये भी सच है कि पिछले 7 माह से स्वास्थ्य केंद्र राम भरोसे चल रहा है।
ऐसा नहीं है कि क्षेत्र के लोगों ने स्वास्थ्य केंद्र में सभी पदों को भरने की मांग न उठाई हो, पर सुनने वाला कोई नहीं है। हालत ये हैं कि अस्पताल में एक्सरे रूम में ताला जड़ दिया गया है। एक तकनीशियन भी नौकरी छोड़ कर चला गया है। अब मरीजों व तीमारदारों को एक्सरे करवाने के लिए 70 किमी दूर पांवटा जाना पड़ रहा है।
गिरिपार क्षेत्र में यह एक मात्र बड़ा अस्पताल है, जहां शिलाई विकास खंड की 29 पंचायतें, समीपवर्ती शिमला जिले की 8 तथा पांवटा विकास खंड की 7 ग्राम पंचायतों के रोगी बड़ी उम्मीद के साथ अपना इलाज करवाने पहुंचते हैं। बिना स्टाफ व पर्याप्त चिकित्सकों के रोगी कई बार पांवटा, नाहन, उत्तराखंड के विकास नगर भेज दिए जाते हैं। अंदाजा लगाया जा सकता है कि जब घर पर ही सही व आवश्यक उपचार नहीं मिल रहा है तो बाहर लोग अपना इलाज कैसे करवाते होंगे।
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भाजपा तथा कांग्रेसी नेताओं पर रोष
क्षेत्रवासी अमर सिंह, कल्याण सिंह, सूरत सिंह, चमेल सिंह, शुपाराम, कमना राम, भज्जूराम आदि का कहना है कि क्षेत्र के पूर्व विधायक व प्रदेश सरकार में रोजगार सृजन बोर्ड के अध्यक्ष हर्ष वर्धन चौहान के अलावा मौजूदा भाजपा विधायक बलदेव तोमर मात्र अपनी राजनीति कर रहे हैं। लोगों की सुध लेने की बजाय पार्टी विरोधी बयानों में समय बिता रहे हैं। लोगों का कहना है कि जनता द्वारा चुने गए उक्त नेताओं को चाहिए कि वह प्रदेश सरकार के समक्ष शिलाई सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की बदहाली के बारे में मुद्दा प्रमुखता से उठाएं ताकि उनकी जनता को घर द्वार पर ही स्वास्थ्य सुविधा मिल सके।
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रिक्त पदों की रिपोर्ट स्वास्थ्य निदेशालय को है भेजी
‘शिलाई स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सकों की कमी के बारे में पूरी रिपोर्ट स्वास्थ्य निदेशालय को भेजी गई है। विभाग केंद्र में स्टाफ की तैनाती को लेकर पूरी तरह से गंभीर है। उम्मीद है कि जल्द रिक्त पद भरे जाएंगे।’
- डॉ. संजय शर्मा, सीएमओ
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