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नाहन में पेयजल संकट के लिए अव्यवस्था जिम्मेवार

Fri, 24 Jun 2016 11:26 PM IST
ब्यूराो, नाहन (सिरमौर)।
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water - फोटो : amar ujala
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नाहन (सिरमौर)। गर्मी के मौसम के दौरान जल स्रोतों में पानी का स्तर जरूर घट गया है लेकिन पेयजल के घोर संकट की वजह काफी हद तक गलत ढंग से आवंटित हुए पेयजल कनेक्शन भी हैं। टैंकों के नजदीक से ही सैकड़ों पेयजल कनेक्शन हैं जिससे पाइपों का जंजाल बन गया है। ऐसे में संबंधित पाइप लाइन के अंतिम छोर में बसे इलाकों में पानी का संकट गहराना स्वाभाविक है। टैंकों के नजदीक निजी पाइपों के जंजाल बन गए हैं। पेयजल के लिए मची इस आपाधापी का खामियाजा ऐसे लोगों को भुगतना पड़ रहा है, जो पाइप लाइन के अंतिम छोर में बसे हुए हैं। उस पर मेन लाइन में ही टुल्लू पंप जोड़कर औरों के हिस्से का पानी भी चूसा जा रहा है।  


50 से हजार की आबादी वाले नाहन शहर में लगभग दस हजार पानी के कनेक्शन आवंटित हुए हैं। हर रोज शहर में 70 लाख लीटर पानी की आवश्यकता रहती है। वर्तमान में विभाग लगभग 35 लाख लीटर पानी मुहैया करवा रहा है जो नाकाफी है। उस पर टैंकों के नजदीक से पानी के कनेक्शन और डायरेक्ट पाइप लाइन में टुल्लू पंप लगने से शहर के कई हिस्सों में पानी का घोर संकट गहरा रहा है।
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लिहाजा, पानी की इस घोर समस्या के लिए अकेले आईपीएच को ही जिम्मेवार नहीं ठहराया जा सकता। इसके लिए आम जनता के भी सहयोग की जरूरत है। हालात यह है कि शहर में पानी के कनेक्शनों की संख्या भी बेतहाशा है। कई स्थानों पर तो पाइपों के ऐसे गुच्छे हैं कि यह पता लगाना मुश्किल है कि किस घर को कौन सी पाइप जा रही है।

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पानी के लिए टूट रहे हर नियम
शहर में पानी की समस्या पहले से है लेकिन पानी भरने के लिए तमाम नियम टूट रहे हैं। आईपीएच के अधिकारियों की मानें तो पाइप लाइन में सीधा टुल्लू पंप नहीं लगाए जा सकते लेकिन शहर में टुल्लू पंप से ही काम चलाया जा रहा है और आईपीएच बेबस है। नियमानुसार एक घर में एक हजार लीटर से अधिक पानी का भंडारण नहीं किया जा सकता लेकिन लोग हजारों लीटर पानी स्टोर कर रहे हैं।
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ये कहना है अधिकारियों का
आईपीएच के सहायक अभियंता नाजीर हुसैन का कहना है कि पानी के कनेक्शन डायरेक्ट नहीं दिए गए हैं, बल्कि टैंक से आगे जो सहयोगी लाइनें हैं वहां से दिए गए हैं। उन्होंने माना कि इससे अंतिम छोर में पानी घट सकता है। कहा कि पानी की सबसे अधिक दिक्कत टुल्लू पंप की वजह से ही रहती है। इस पर कार्रवाई करने की योजना है।
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35 लाख लीटर में करना पड़ रहा गुजारा
गिरि नदी पर प्रस्तावित नई योजना में भी अड़ंगा
खैरी एवं नहर स्वार पेयजल योजना से हो रही सप्लाई
अमर उजाला ब्यूरो
नाहन (सिरमौर)। शहर की 40 से 50 हजार आबादी को महज 35 लाख लीटर पानी में ही गुजारा करना पड़ रहा है। गर्मी में हर साल यहां पानी की किल्लत रहती है। शहर की आबादी लगभग 40 हजार है। जबकि इतने ही बाहरी लोग यहां रह रहे हैं जिससे पेयजल योजना पर दबाव बढ़ गया है। इससे आईपीएच को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि, शहर के लिए गिरि नदी पर नई पेयजल योजना प्रस्तावित है। इससे शहर में पानी की किल्लत नहीं रहेगी लेकिन दो साल वन विभाग की क्लीयरेंस में लटकने के बाद अब इस योजना को एक पंचायत से एनओसी नहीं मिल रही है। लिहाजा, योजना के निर्माण में फिर पेंच फंस गया है।
शहर में इस समय खैरी एवं नहर स्वार मुख्य पेयजल योजनाओं से पानी की आपूर्ति हो रही है। खैरी व स्वार पेयजल योजना से प्रतिदिन 34-35 लाख लीटर  करीब साढ़े छह लाख लीटर पानी मिल रहा है जो शहर की जनसंख्या के हिसाब से पर्याप्त नहीं है। शहर में प्रतिदिन 70 लाख लीटर पानी की आवश्यकता है। आईपीएच के सहायक अभियंता नाजीर हुसैन ने बताया कि शहर के लिए नई पेयजल योजना बन रही है। इसके बाद इस शहर में चल रही पानी की किल्लत से निजात मिलने की उम्मीद है।
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सुर्खियों में रहा है पानी का मुद्दा
नाहन (सिरमौर)। नाहन में पानी का मुद्दा अक्सर सुर्खियों में रहा है। सियासत के खेल में भी पानी के मुद्दे पर राजनीतिक दलों में पानी पर शह और मात का खेल खूब चलता रहा है। सत्तारूढ़ दल विपक्ष के लोगों पर नई योजना के कार्य को लटकाने का आरोप लगाती रही है तो विपक्ष सत्तारूढ़ पर जनता की अनदेखी का। स्थानीय विधायक ने विधायक निधि से बांकूवाला में बोरवेल लगाया। अब उसे भी चालू करने की दरकार है। जबकि सरकार भी शहर में दो नए बोरवेल लगाने वाली है। ऐसे में पेयजल समस्या के समाधान का श्रेय लेने की भी होड़ मची हुई है। विधानसभा, लोकसभा हो या फिर पंचायत चुनाव यहां पानी का मुद्दा हाबी रहा है।
 
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