-हरिद्वार से गंगाजल लेकर लौटे कांवड़ियों के दल, बैंड-बाजों और डीजे के साथ निकली शिव बारात
सावन के दूसरे सोमवार को पातालेश्वर महादेव सहित शिवालयों में उमड़ा आस्था का सैलाब, जलाभिषेक के लिए लगी कतारें
संवाद न्यूज एजेंसी
पांवटा साहिब (सिरमौर)। सावन माह के दूसरे सोमवार को पांवटा साहिब पूरी तरह शिवमय नजर आया। शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक चारों ओर बम-बम भोले और हर-हर महादेव के जयकारे गूंजते रहे। हरिद्वार से पवित्र गंगाजल कांवड़ में लेकर लौटे कांवड़ियों के दल आस्था और उत्साह से सराबोर दिखाई दिए। कांवड़िए भगवान शिव का जयघोष करते हुए अपने गंतव्य की ओर बढ़ते नजर आए। मंगलवार को सावन की शिवरात्रि के चलते शिवालयों में श्रद्धालुओं की भीड़ और बढ़ने की उम्मीद है।
सावन माह में गंगाजल कांवड़ में लेकर भगवान शिव का जलाभिषेक करना बेहद पवित्र और कल्याणकारी माना जाता है। इसी आस्था के चलते हरिद्वार से गंगाजल लेकर लौट रहे कांवड़ियों के दलों का जगह-जगह स्वागत किया जा रहा है। कई दल बैंड-बाजों और डीजे की धुन पर भगवान शिव की बारात निकालते हुए पांवटा साहिब पहुंचे। कांवड़ियों के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा।
कांवड़ियों की सेवा के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग के साथ जगह-जगह कांवड़ सेवा शिविर लगाए गए हैं। इन शिविरों में श्रद्धालुओं के लिए भोजन, लंगर, ठहरने और प्राथमिक उपचार सहित विभिन्न सुविधाएं उपलब्ध करवाई जा रही हैं। सेवा मंडलों के सदस्य पिछले कई दिनों से पूरी श्रद्धा और सेवाभाव के साथ कांवड़ियों की सेवा में जुटे हुए हैं।
शहर के प्रवेश द्वार से लेकर बाईपास और माजरा क्षेत्र तक जगह-जगह लंगर लगाए गए हैं। कांवड़ियों को पूरी-छोले, मटर पनीर, पनीर भुर्जी, ब्रेड, कॉफी, सूखे मेवों वाली खीर और फल सहित विभिन्न प्रकार के प्रसाद और भोजन वितरित किए जा रहे हैं। शहर के चौक-चौराहों पर लाउडस्पीकरों से भगवान शिव की महिमा और भजनों की गूंज सुनाई दे रही है।
शिवालयों में जलाभिषेक के लिए लगीं कतारें
सावन के दूसरे सोमवार को पांवटा साहिब के प्राचीन पातालेश्वर महादेव मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं। भक्तों ने भगवान शिव के शिवलिंग पर दूध और गंगाजल अर्पित कर पूजा-अर्चना की और सुख-समृद्धि की कामना की। मंदिर परिसर में दिनभर भक्तों की आवाजाही बनी रही। इसके अलावा बद्रीपुर, बेहड़ेवाला, माजरा, कोलर, बांगरन, गीता भवन, विश्वकर्मा मंदिर और राधाकृष्ण मंदिर सहित क्षेत्र के विभिन्न शिवालयों में भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। महिलाओं और युवतियों ने सावन सोमवार का व्रत रखकर भगवान शिव की पूजा-अर्चना की।
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सावन में शिव आराधना का विशेष महत्व
रामकिशन शर्मा, नरेश शर्मा, रमेश शर्मा, सुशील शर्मा, पंकज शर्मा और रामकृष्णन ने बताया कि सनातन परंपरा में सावन माह को भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना गया है। इस माह में कांवड़ के माध्यम से पवित्र गंगाजल लाकर भगवान शिव का अभिषेक करने की परंपरा है। मान्यता है कि सावन में गंगाजल से भगवान शिव का अभिषेक और विधि-विधान से पूजा करने से कष्ट दूर होते हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
उन्होंने बताया कि इसी आस्था के चलते सावन माह में बड़ी संख्या में श्रद्धालु हरिद्वार सहित विभिन्न तीर्थस्थलों से गंगाजल लेकर कांवड़ यात्रा करते हैं। विशेष रूप से सावन के सोमवार को महिलाएं और युवतियां व्रत रखकर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना करती हैं।
हरिद्वार से पवित्र गंगा जल लेकर लौटे गिरिपार क्षेत्र के ग्राम नघेता का कांवड़ दल। संवाद
हरिद्वार से पवित्र गंगा जल लेकर लौटे गिरिपार क्षेत्र के ग्राम नघेता का कांवड़ दल। संवाद
हरिद्वार से पवित्र गंगा जल लेकर लौटे गिरिपार क्षेत्र के ग्राम नघेता का कांवड़ दल। संवाद
हरिद्वार से पवित्र गंगा जल लेकर लौटे गिरिपार क्षेत्र के ग्राम नघेता का कांवड़ दल। संवाद