संवाद न्यूज एजेंसी
सराहां (सिरमौर)। पच्छाद क्षेत्र में देर शाम हुई भारी ओलावृष्टि ने क्षेत्र के किसानों और बागवानों पर कहर बरपाया है। भारी ओलावृष्टि से गेहूं, जौ सहित तैयार खड़ी नकदी फसलों और फलों के बगीचों को भारी क्षति पहुंची है, जिससे अन्नदाताओं की साल भर की मेहनत पर पानी फिर गया है।
क्षेत्र में इन दिनों गेहूं और जौ की फसल पूरी तरह पककर तैयार थी और कटाई का दौर शुरू होने वाला था, लेकिन कुदरत की मार ने सुनहरी फसल को मिट्टी में मिला दिया। इसके अलावा, किसानों की ओर से हाल ही में रोपी गई टमाटर और शिमला मिर्च की नई पौध भी ओलावृष्टि की भेंट चढ़ गई है। कई इलाकों में ओले इतने अधिक गिरे कि खेतों में लगे पौधे तक नजर नहीं आ रहे हैं।
फसलों के साथ-साथ बागवानी क्षेत्र को भी गहरा झटका लगा है। क्षेत्र के मुख्य फल प्लम, खुमानी और आड़ू के पेड़ों पर लगे फलों और पौधों को ओलावृष्टि से भारी नुकसान हुआ है। इससे बागवानों के सामने अब आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
ओलावृष्टि का मुख्य प्रभाव बाग पशोग, नैना टिक्कर, साधना घाट, धार टिक्करी, जयहर, डिंगर किन्नर, डिलमन और नारग पंचायतों के विभिन्न गांवों में देखा गया है। नैना टिक्कर के निवासी सोम प्रकाश, राजेश कुमार, दिलीप सिंह, कुंदन सिंह, रजनीश शर्मा, भीम दत्त, सुरजन सिंह और विनोद कुमार ने बताया कि ओलावृष्टि इतनी भीषण थी कि उनकी सारी उम्मीदें खत्म हो गई हैं। किसानों और बागवानों में भारी निराशा है। उन्होंने प्रदेश सरकार और संबंधित विभाग से मांग की है कि प्रभावित क्षेत्रों का तुरंत मुआयना करवाया जाए और हुए नुकसान का उचित आकलन कर जल्द से जल्द मुआवजे का प्रावधान किया जाए, ताकि आर्थिक तंगी से जूझ रहे किसानों को कुछ राहत मिल सके।
-संवाद