सतौन (सिरमौर)। शिलाई के कफोटा सब डिविजन के अंतर्गत क्षेत्र की शरली पंचायत में एक महीने से पानी की गंभीर समस्या हो रही है। ग्रामीण पीने के पानी की एक एक बूंद को मोहताज हैं। ग्रामीणों को रोजाना किराये की गाड़ियों और खच्चरों सेे पानी ढोना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने इस समस्या के लिए आईपीएच की कार्यप्रणाली को जिम्मेदार ठहराया है।
मस्तभोज क्षेत्र की शरली पंचायत के तीन गांवों शरली, गुद्दी, मानपुर के लगभग 500 परिवार पीने के पानी की समस्या से जूझ रहे हैं। 90 फीसदी ग्रामीणों को एक महीने से पीने का पानी नहीं मिल पा रहा है। मात्र 10 फीसदी ग्रामीणों को पानी की सप्लाई मिल पा रही है। शरली पंचायत के पूर्व प्रधान जगत सिंह चौहान सहित ग्रामीण खजान सिंह चौहान, गयारु राम चौहान, ओम प्रकाश, सतपाल चौहान, माया राम, कुंदन सिंह शास्त्री, मदन सिंह आदि ने बताया कि तीन गांव को नेड़ा खड्ड से उठाऊ पेयजल स्कीम से पेयजल की सप्लाई है। पानी की पर्याप्त मात्रा है, लेकिन वितरण सही ना होने के कारण केवल 10 फीसदी ग्रामीणों को पानी की सप्लाई जा रही है। 10 फीसदी ग्रामीणों के नलकों मे कोई कंट्रोलर नहीं होने के कारण एक इंच की बजाए तीन इंच पानी जा रहा है जिस कारण 90 फीसदी ग्रामीणों को पानी नहीं मिल पा रहा है।
ग्रामीणों ने बताया कि कुछ लोग राजनैतिक पहुंच होने के कारण विभाग उन पर कार्रवाई करने में कतरा रहा है। ग्रामीणों को मजबूरन पीने का पानी गाड़ियों और खच्चरों के माध्यम से ढोना पड़ रहा है। इसके एवज में ग्रामीणों को गाड़ी को एक दिन का किराया तीन सौ और खच्चर को एक दिन की दिहाड़ी 800 रुपये देनी पड़ रही है, नहीं तो ग्रामीणों को दो किलोमीटर दूर खड़ी चढ़ाई से पानी ढो रहे हैं।
उधर इस संदर्भ में कफोटा सब डिविजन के सहायक अभियंता विरेंद्र शर्मा ने बताया कि लो वोल्टेज के कारण पेयजल स्कीम चलने में परेशानी हो रही थी लेकिन अब रोजाना 5 घंटे स्कीम चल रही है और पानी से स्टोर टैंक भरे हुए हैं। वह गांव का निरीक्षण करेंगे और बिना कंट्रोलर वाले नलकों पर तुरंत कंट्रोलर लगाया जाएगा।