अभियोजन आरोप साबित करने में रहा नाकाम, साक्ष्यों और सीमांकन रिपोर्ट में मिलीं कई खामियां
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। वन क्षेत्र में कायल के पेड़ काटने के मामले में अदालत ने आरोपी जय प्रकाश को राहत देते हुए आरोपों से बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ अपराध को संदेह से परे साबित करने में सफल नहीं रहा।
यह मामला 5 जून 2017 को राजगढ़ थाना में पंजीकृत है। अभियोजन के अनुसार 3 जून को वन विभाग के कर्मचारियों ने गश्त के दौरान दो कायल के पेड़ कटे हुए पाए थे। आरोप था कि पेड़ों को जय प्रकाश ने काटकर उनकी लकड़ी को अपने खेत में तारबाड़ के लिए इस्तेमाल किया। मामले में अभियोजन पक्ष ने कुल नौ गवाह पेश किए। आरोपी ने अदालत में आरोपों से इनकार किया और स्वयं को निर्दोष बताया।
अदालत ने फैसले में गवाहों के बयानों में कई विरोधाभासों को महत्वपूर्ण माना। मामले में कोई प्रत्यक्षदर्शी नहीं था और स्वतंत्र गवाह को भी शामिल नहीं किया गया। गवाहों के बयानों में घटनास्थल, आबादी, दस्तावेज तैयार करने तथा पुलिस जांच को लेकर भी अंतर सामने आया। अदालत ने यह भी पाया कि कथित वन भूमि के सीमांकन में भी प्रक्रिया संबंधी कमियां थीं।
न्यायिक मजिस्ट्रेट रितु सिन्हा ने कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्यों के आधार पर अभियोजन आरोपी का अपराध संदेह से परे साबित नहीं कर पाया। इसलिए दोनों आरोपों पर अभियोजन के पक्ष में निष्कर्ष नहीं दिया जा सकता। अदालत ने आईपीसी की धारा 379 और आईएफए की धारा 26 के तहत लगाए गए आरोपों से जय प्रकाश को बरी कर दिया।