नौ वर्षीय जाबिर और सात वर्षीय सत्यम दोस्तों के साथ जम्मूखाले में नहाने गए थे
उत्तर प्रदेश और बिहार से रोजगार की तलाश में निहालगढ़ आए थे दोनों बच्चों के परिवार
घटनास्थल पर देर शाम तक बच्चों के सुरक्षित मिलने की उम्मीद लगाए बैठे रहे परिजन
सुरेश तोमर
पांवटा साहिब। रविवार का दिन निहालगढ़ में रहने वाले दो परिवारों के लिए कभी न भूल पाने वाला दर्द छोड़ गया। सुबह तक घर में खेलते-कूदते बच्चों की आवाजें गूंज रही थीं, लेकिन शाम होते-होते वही घर मातम में डूब गए। नौ वर्षीय जाबिर और सात वर्षीय सत्यम अपने दोस्तों के साथ जम्मूखाले में नहाने गए थे। परिवारों को जरा भी अंदाजा नहीं था कि बच्चों की यह आखिरी विदाई होगी।जाबिर के परिवार का मूल गांव उत्तर प्रदेश के गाजीपुर में है, जबकि सत्यम का परिवार बिहार के समस्तीपुर का रहने वाला है। दोनों परिवार रोजगार की तलाश में निहालगढ़ आए थे और किराए के मकान में रहकर बच्चों के भविष्य के सपने संजो रहे थे। बच्चों की छोटी-छोटी शरारतें और मासूम बातें ही इन परिवारों की सबसे बड़ी खुशी थीं।
हादसे की खबर मिलते ही दोनों परिवार घटनास्थल की ओर दौड़ पड़े। खड्ड के किनारे देर शाम तक परिजनों की आंखें अपने बच्चों को तलाशती रहीं। हर गुजरते पल के साथ उनकी बेचैनी बढ़ती गई। ग्रामीण और स्थानीय गोताखोर पानी में बच्चों की तलाश करते रहे और परिजन किनारे खड़े होकर उनके सुरक्षित मिलने की उम्मीद लगाए रहे।
पहले जाबिर को पानी से बाहर निकाला गया। उसे अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। इसके बाद सत्यम की तलाश जारी रही। देर शाम उसका शव भी बरामद हुआ। इसके साथ ही दोनों परिवारों की आखिरी उम्मीद भी टूट गई।
बच्चों के शव मिलने की खबर से मौके पर मौजूद परिजनों में चीख-पुकार मच गई। मां-बाप बार-बार अपने बच्चों को पुकारते रहे। जिन हाथों ने सुबह बच्चों को तैयार कर घर से भेजा था, वही हाथ शाम को उन्हें वापस पाने के लिए बेबस नजर आए। परिवारों को अब भी यकीन नहीं हो रहा कि जिन बच्चों को वे कुछ घंटे पहले हंसते-खेलते देख रहे थे, वे अब उनके बीच नहीं हैं।
निहालगढ़ के लोगों ने भी इस हादसे पर गहरा दुख जताया। देर शाम तक खड्ड के आसपास पसरा सन्नाटा हादसे की भयावहता बयां कर रहा था। दो मासूम जिंदगियों के बुझ जाने से दो परिवारों के भविष्य के सपने भी जैसे थम गए हैं। सोमवार को पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंपे जाएंगे। इसके बाद दोनों परिवार अपने बच्चों को अंतिम विदाई देंगे - ऐसी विदाई, जिसके लिए किसी माता-पिता ने कभी कल्पना भी नहीं की होगी।